नई दिल्ली: रसोई गैस उपभोक्ताओं के लिए आने वाला समय चुनौतियों भरा हो सकता है. हर महीने की पहली तारीख को होने वाली समीक्षा में इस बार 1 मई से घरेलू गैस सिलेंडर के दामों में भारी इजाफे के संकेत मिल रहे हैं. विशेष रूप से तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल के चुनाव संपन्न होने के बाद सरकारी तेल कंपनियां कीमतों में फेरबदल कर सकती हैं. इसके साथ ही पेट्रोलियम मंत्रालय ने सप्लाई चेन को व्यवस्थित करने के लिए कई कड़े कदम उठाए हैं, जिससे आम आदमी की जेब और रसोई का बजट दोनों प्रभावित होने की संभावना है.
पेट्रोलियम मंत्रालय ने फिलहाल देश भर में नए एलपीजी कनेक्शन जारी करने पर रोक लगा दी है. मंत्रालय का स्पष्ट निर्देश है कि तेल कंपनियों को अभी अपना पूरा ध्यान मौजूदा उपभोक्ताओं की जरूरतों को पूरा करने पर केंद्रित करना चाहिए. आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, कम से कम एक महीने तक किसी भी नए आवेदन पर विचार नहीं किया जाएगा. इस फैसले का मुख्य उद्देश्य घरेलू स्तर पर गैस की निरंतर आपूर्ति सुनिश्चित करना है ताकि वर्तमान ग्राहकों को किसी भी तरह की किल्लत का सामना न करना पड़े.
सरकार अब गैस सिलेंडर की बुकिंग प्रक्रिया में बड़े बदलावों को स्थाई करने की योजना बना रही है. वर्तमान में शहरी क्षेत्रों में दो रिफिल के बीच 25 दिन और ग्रामीण इलाकों में 45 दिन का अंतर रखना अनिवार्य है. सरकार इस समय सीमा वाले नियम को अब हमेशा के लिए लागू करने की तैयारी में है. इसका सीधा मतलब यह है कि उपभोक्ता अब अपनी जरूरत पड़ने पर तुरंत दूसरा सिलेंडर बुक नहीं कर पाएंगे. इस फैसले से बड़े परिवारों के लिए अपनी मासिक गैस खपत का प्रबंधन करना एक चुनौतीपूर्ण कार्य हो सकता है.
गैस डिलीवरी में पारदर्शिता लाने और फर्जीवाड़े को रोकने के लिए ओटीपी आधारित डिलीवरी सिस्टम को अब पूरी तरह अनिवार्य बनाया जा रहा है. अब से बिना रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर पर आए सिक्योरिटी कोड के उपभोक्ता को सिलेंडर की डिलीवरी नहीं दी जाएगी. मंत्रालय इस नियम को कड़ाई से लागू करने के पक्ष में है ताकि बिचौलियों और फर्जी बुकिंग के जरिए होने वाले खेल को खत्म किया जा सके. इससे यह सुनिश्चित होगा कि सिलेंडर केवल सही हकदार तक ही पहुंच रहा है और डेटा पूरी तरह पारदर्शी बना हुआ है.
दक्षिण भारत के प्रमुख शहरों जैसे हैदराबाद, विशाखापट्टनम और विजयवाड़ा में कमर्शियल सप्लाई की भारी कमी देखी जा रही है. स्थिति यह है कि होटलों और व्यावसायिक संस्थानों को पर्याप्त गैस नहीं मिल पा रही है, जिससे वे घरेलू सिलेंडरों का अवैध इस्तेमाल करने को मजबूर हैं. हालांकि प्रशासन लगातार छापेमारी कर रहा है, लेकिन इसके बावजूद बाजार में सिलेंडरों की ब्लैक मार्केटिंग की खबरें थम नहीं रही हैं. इस स्थिति के कारण आम घरेलू उपभोक्ताओं को भी समय पर सिलेंडर मिलने में भारी कठिनाई का सामना करना पड़ रहा है.