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सूखे का संकट: कहीं बरसे बादल तो कहीं बारिश की बूंद को तरसे लोग, 1901 के बाद से अब तक अगस्त में सबसे कम बारिश

Monsoon Update: रिपोर्ट्स की मानें तो 1901 के बाद से अगस्त का महीना अब तक सबसे सूखा महीना बन गया है. यानी 122 साल के इतिहास में अगस्त माह में सबसे कम बारिश हुई है.

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Gyanendra Tiwari
सूखे का संकट: कहीं बरसे बादल तो कहीं बारिश की बूंद को तरसे लोग, 1901 के बाद से अब तक अगस्त में सबसे कम बारिश

नई दिल्ली. देश के कई राज्यों में बारिश आफत बनकर आई है. अगस्त महीना खत्म होने को आ गया है. अभी भी कई जगह बारिश हो लेकिन लेकिन देश के कई इलाके अभी भी बारिश के लिए तरस रहे हैं. मौसम विभाग की मानें तो देश के ज्यादातर हिस्सों में बारिश नहीं  होने की संभावना है.

1901 के बाद अगस्त में सबसे कम बारिश
रिपोर्ट्स की मानें तो 1901 के बाद से अगस्त का महीना अब तक सबसे सूखा महीना बन गया है. यानी 122 साल के इतिहास में अगस्त माह में सबसे कम बारिश हुई है.  कुछ राज्यों को छोड़ दे तो देश के ज्यादातर राज्यों में अगस्त माह में औसत से बहुत कम बारिश हुई है. अगस्त के 29 दिनों के औसत बारिश की बात करें तो इस बार यह 27.55 डिग्री रहा है. ऐसे में 2 दिन बार अगस्त महीना सबसे गर्म महीने के रूप में इतिहास के पन्नों में दर्ज हो सकता है.  इस बार अगस्त में 33 फीसदी कम बारिश हुई है. यह आंकड़ा 35 फीसदी तक भी जा सकता है. 1941 के जुलाई-अगस्त के महीने में मानसून ब्रेक 27 दिन का था वहीं इस बार यह ब्रेक केवल 23 का रहा है.

इस बार देश के कई राज्यों में मानसूनी बारिश में भारी कमी आई है. रिपोर्ट्स की मानें तो दक्षिण भारत में 61%, मध्य भारत में 44% और उत्तर पश्चिमी भारत में 35% तक मानसूनी बारिश में कमी आई है. अगर ओवर आल डाटा की बात करें तो इस बार अब तक 9 प्रतिशत की कमी आई है. अगर अगस्त के बचे आखिरी दो दिनों में झमाझम बारिश नहीं हुई तो यह बीते 8 सालों में सबसे कम बारिश वाला मानसून रहेगा.


कम बारिश होने का कारण
अगस्त माह में हुई कम बारिश को लेकर मौसम वैज्ञानिकों ने कई कारण बताए हैं. जैसे बंगाल की खाड़ी में स्ट्रॉन्ग सिस्टम का न बनना, मानसून ट्रफ लाइन का एक सिरा हिमालय की ओर चले जाना. इन कारणों के साथ-साथ अल-नीनो का सक्रिय होना अगस्त माह में हुई कम बारिश का कारण बताया जा रहा है. दरअसल, जब भी जब अलनीनो सक्रिय होता है तो देश का मानसून कमजोर हो जाता है. जब मानसून कमजोर होगा, तो देश के कई राज्यों में बारिश नहीं होगी. ऐसे में सूखे जैसी स्थिति देखने को मिल जाती है. रिपोर्ट्स यही कह रही है कि जब जब भारत में अल नीनो सक्रिय रहा तब तब देश में भारी सूखा पड़ा है. रिपोर्ट्स की मानें तो पिछले 65 वर्षों में 14 बार अल-नीनो पैसिफिक ओशिएन में सक्रिय रहा है. इन 14 बार में भारत में 9 बार  बड़े स्तर पर सूखा पड़ा है.

कम बारिश से क्या असर पड़ेगा? 
ज्यादातर जल स्रोतों को भरने के लिए बारिश के पानी का ही इस्तेमाल किया जाता है. आंकड़ों की मानें तो खेत, तालाब और जल स्रोतों को भरने के लिए  70% फीसदी बारिश के पानी पर निर्भर रहना पड़ता है. इस स्थिति जल स्रोतों के सूखने का खतरा है. इतना ही नहीं दक्षिण, पश्चिम और मध्य भारत में न के बराबर हुई बारिश ने किसानों की टेंशन बढ़ा दी है. धान, मक्का, सोयाबीन, गन्ना, मूंगफली की बुआई मानसून सीजन में ही की जाती है. बारिश न होने की वजह से फसल की ग्रोथ नहीं हो पाती क्योंकि मिट्टी में नमी बचती ही नहीं. इसका नतीजा यह होगा कि पैदावार कम होगी. जब पैदावार कम होगी तो खाद्यान्न की कीमतों में भारी उछाल देखने को मिल सकता है.

जल्दी हो सकती है मानसून की विदाई!
मौसम विभाग के वैज्ञानिकों के मुताबिक सितंबर महीने में 4 से 10 तारीख के बीच मानसून की आखिरी बारिश हो सकती है. मानसून के जानें को लेकर वरिष्ठ वैज्ञानिक ने बताया है कि अभी मानसून की विदाई की स्थिति फिलहाल निश्चित नहीं है. वैसे 17 सितंबर से मानसून की विदाई होने लगती है लेकिन इस बार इसके पहले जाने की उम्मीद लगाई जा रही है. 

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