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लक्षद्वीप पर पाकिस्तान करने वाला था कब्जा... फिर 'लौह पुरुष' ने चली ऐसी चाल की पस्त हो गया पाकिस्तान

Lakshadweep: इस प्रोजेक्ट के तहत लक्षद्वीप के बीचों की सफाई कर खारे पानी को मीठे पानी में बदला जाएगा. इन सबके बीच लोग लक्षद्वीप के भारत में शामिल होने की भी चर्चा कर रहे हैं.  आइए जानते हैं कि कैसे लक्षद्वीप कैसे भारत का हिस्सा बना था.

Gyanendra Tiwari

Lakshadweep: इस समय लक्षद्वीप चर्चा का विषय बना हुआ. इसमें कई देशों की भी एंट्री हो चुकी है. चीन ने अपने ग्लोबल टाइम्स में मालदीव-भारत के विवाद को लेकर लिखा कि एशिया में चीन को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है. वहीं, इजरायल ने लक्षद्वीप में डिसेलिनेशन प्रोजेक्ट का एलान किया है. इस प्रोजेक्ट के तहत लक्षद्वीप के बीचों की सफाई कर, खारे पानी को मीठे पानी में बदला जाएगा. इन सबके बीच लोग लक्षद्वीप के भारत में शामिल होने की भी चर्चा कर रहे हैं. आइए जानते हैं कि कैसे लक्षद्वीप कैसे भारत का हिस्सा बना था.

हम सब जानते हैं कि अंग्रेजों ने जब भारत को आजाद किया तो उसके दो टुकड़े कर दिए थे. एक पाकिस्तान तो दूसरा भारत. आजादी के उस विध्वंस को नहीं भुलाया जा सकता. पाकिस्तान के संस्थापक मोहम्मद अली जिन्ना हर उस मुस्लिम रियासतों को पाकिस्तान में शामिल करना चाहते थे जो मुस्लिम बहुत थी.
 

हैदराबाद, कश्मीर और जूनागढ़ जैसे मुस्लिम बहुल जगहों को पाकिस्तान में शामिल करने के लिए मोहम्मद अली जिन्ना ने एड़ी चोटी का पसीना लगा दिया था. लेकिन वो कामयाब नहीं हो पाए. इसी तरह 93 फीसदी मुस्लिम बहुल इलाके लक्षद्वीप पर भी पाकिस्तान ने कब्जा करने के लिए जहाज भेजा था. लेकिन जैसे ही ये सूचना सरदार पटेल जी को मिली तो उन्होंने दक्षिण रियासत के मुदलियार बंधुओं के साथ मिलकर पाक के मंसूबों को नाकाम कर दिया.

दक्षिणी रियासत के मुदलियार बंधुओं के साथ त्रावणकोर रियासत के लोगों ने मिलकर लक्षद्वीप में जाकर भारत का झंडा लहरा दिया. और पाकिस्तान मुंह ही देखता ही रह गया. अगर उस समय गृह मंत्री सरदार वल्लभ भाई पटेल ने कदम न उठाया होता तो आज लक्षद्वीप भारत का हिस्सा नहीं होता. 

 

लक्षद्वीप अपनी प्राकृतिक खूबसूरती के लिए जाना जाता है. हाल ही पीएम मोदी ने लक्षद्वीप की यात्रा की थी. उन्होंने अपने यात्रा की तस्वीरें सोशल मीडिया पर शेयर कर लोगों से लक्षद्वीप जाने को कहा था. उसके बाद से ही लक्षद्वीप और मालदीव के बीच सोशल मीडिया पर विवाद बढ़ता चला गया. हम भारतीय घूमने जाने के लिए लक्षद्वीप की बात करने लगे. ये बात मालदीव के कुछ नेताओं को पसंद नहीं आई तो उन्होंने पीएम मोदी पर अभद्र टिप्पणी कर दी. इसके बाद मामला इतना बढ़ा कि मालदीव सरकार ने उन्हें बर्खास्त कर दिया. अभी भी मालदीव-लक्षद्वीप विवाद सोशल मीडिया पर छाया हुआ है.