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ट्रंप के अड़ियलपन की सजा भुगत रहा मिडिल ईस्ट, ईरान ने UAE पर किया मिसाइल-ड्रोन से हमला

खाड़ी क्षेत्र में एक बार फिर से तनाव अपने चरम पर पहुंच गया है. ईरान ने संयुक्त अरब अमीरात पर ड्रोन और मिसाइल से हमला कर दिया है.

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Ashutosh Rai

ईरान और अमेरिका के बीच हुए संघर्ष विराम के बाद अब खाड़ी देशों में शांति भंग होती नजर आ रही है. संयुक्त अरब अमीरात के रक्षा मंत्रालय ने जानकारी दी है कि उसकी हवाई सुरक्षा प्रणाली ने ईरान से दागी गई तीन बैलिस्टिक मिसाइलों और ड्रोनों को हवा में ही नष्ट कर दिया. वहीं एक समुद्र में जा गिरी.

यूएई पर मिसाइल और ड्रोन से हमला

संयुक्त अरब अमीरात की सेना सुरक्षा में जुटी है. रक्षा मंत्रालय के अनुसार, हमले में ईरान की तरफ से मिसाइलें और ड्रोन दागे गए थे. यूएई की सेना ने इसका डटकर मुकाबला किया. सेना ने तीन मिसाइलों को आबादी वाले क्षेत्रों तक पहुंचने से पहले ही नष्ट कर दिया. दूसरी ओर, फुजैराह में ईरानी ड्रोन के कारण तेल संयंत्र में भीषण आग लग गई. इस घटना में तीन भारतीय नागरिकों को मामूली चोटें आई हैं, जिन्हें तुरंत अस्पताल ले जाया गया.

होर्मुज जलडमरूमध्य में फंसे जहाजों का संकट

होर्मुज जलडमरूमध्य में हालात काफी तनावपूर्ण बने हुए हैं. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ऐलान किया है कि सेना फंसे व्यापारिक जहाजों को बाहर निकालने के लिए एक विशेष अभियान शुरू करेगी. ट्रंप ने इसे चालक दल की मदद के लिए एक पूरी तरह से मानवीय प्रयास बताया है. वहीं ईरानी मीडिया ने दावा किया है कि तेहरान की नौसेना ने अमेरिकी युद्धपोतों पर चेतावनी के तौर पर गोलियां दागी हैं. इसके अलावा यूएई ने खाली जहाज पर हुए ड्रोन हमले की निंदा की है.

मंडराता युद्ध का खतरा

इस ड्रोन हमले ने यूएई में उस शांतिपूर्ण दौर को पूरी तरह समाप्त कर दिया है. यह विराम 8 अप्रैल को वाशिंगटन और तेहरान के बीच हुए संघर्ष विराम के बाद कायम हुआ था. यह संघर्ष विराम पाकिस्तान की मध्यस्थता से मुमकिन हो पाया था. इससे पहले चले भीषण युद्ध के दौरान यूएई सबसे ज्यादा हमलों का शिकार हुआ था और उसने हजारों मिसाइलों को नष्ट किया था.

ठप पड़ी बातचीत

वाशिंगटन और तेहरान के बीच होर्मुज जलडमरूमध्य पर नियंत्रण का विवाद सुलझता हुआ नहीं दिख रहा है. आठ अप्रैल के संघर्ष विराम के बाद से ही दोनों देशों के बीच अहम बातचीत पूरी तरह से रुकी हुई है. इसे सुलझाने के लिए ग्यारह अप्रैल को इस्लामाबाद में दोनों पक्षों के बीच सीधी बातचीत हुई थी, लेकिन वह किसी समझौते तक पहुंचने में विफल रही. बाद में पाकिस्तान के अनुरोध पर ट्रंप ने बिना नई समय-सीमा तय किए संघर्ष-विराम को आगे बढ़ाया था.