Chandrayaan-3 on Moon: कल यानी 23 अगस्त को भारत इतिहास रचने जा रहा है. इंडिया का मून मिशन चंद्रयान-3 इस समय चांद की सतह से मात्र 25 किलोमीटर की दूरी पर है. कल शाम 6 बजकर 4 मिनट पर विक्रम लैंडर चांद की सतह पर भारत (India) का परचम लहराएगा. ऐसे में हमारे लिए चांद के बारे में जानना बेहद जरूरी है. आइए चांद से जुड़े कुछ अनसुलझे रहस्य के बारे में जानते हैं.
चंद्रमा के बारे में कुछ तथ्य
- चंद्रमा पृथ्वी का एकमात्र प्राकृतिक उपग्रह है, जो धरती के चक्कर लगाता है. वैज्ञानिकों की मानें तो यह 4.5 अरब साल पहले पृथ्वी और थीया (एक प्रकार मार्स जैसा ग्रह) के बीच हुए टकराव के चलते उत्पन्न हुआ है.
- चांद का एक दिन पृथ्वी के 29 दिन के बराबर होता है. वहां दिन-रात में बड़ा अंतर होता है.
- पृथ्वी, सूरज का चक्कर लगाती है. इसके साथ ही धरती अपने आर्बिट पर भी घूमती है लेकिन चांद ऐसा नहीं करता है. वह सिर्फ पृथ्वी का चक्कर ही लगाता है. इसलिए उसका एक ही हिस्सा ही हमें दिखता है.
- चांद पर आपको सिर्फ बड़े-बड़े पत्थर और गड्ढे ही मिलेंगी. इसके अलावा कुछ नहीं. विशालकाय गड्ढों को क्रेटर कहा जाता है. ये आकार में इतने बड़े होते हैं कि इनमें माउंट एवरेस्ट सम जाए.
- पृथ्वी पर आपने भूकंप के झटके तो महसूस किए ही होंगे. ठीक इसी प्रकार चांद पर भी भूकंप के झटके महसूस किए जाते हैं.
- पृथ्वी और चांद की दूरी 384, 403 किलोमीटर है लेकिन हर साल ये दूरी बढ़ती जा रही है. प्रत्येक वर्ष धरती से चांद 3.78 सेमी दूर होता जा रहा है. अभी वर्तमान में चांद धरती का चक्कर पूरा करने में 28 दिन का समय लेता है लेकिन 50 अरब वर्ष बाद चांद को पृथ्वी का चक्कर लगाने में 47 दिन का वक्त लगेगा.
- चांद पर अब तक कई अंतरिक्ष यात्री कदम रख चुके हैं. चंद्रमा की गुरुत्वाकर्षण शक्ति पृथ्वी के मुकाबले कम होती है. यहां पर कदम रखते ही इंसान का वजन 16.5 किलोग्राम तक कम हो जाता है. यानी अगर आप 16.5 किलों के हैं तो चांद पर आपका वजन शून्य किलोग्राम हो जाएगा.
- चांद पर कोई Atmosphere नहीं है. यहां का तापमान घटता-बढ़ता रहता है. कभी -150 डिग्री सेल्सियस तो कभी +200 डिग्री सेल्सियस तक यहां टेंपरेचर घट-बढ़ जाता है.
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