अगर आपने 2000 के दशक में इंटरनेट इस्तेमाल किया है, तो Orkut का नाम सुनते ही पुरानी यादें ताजा हो सकती हैं. कभी भारत के सबसे लोकप्रिय सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म में शामिल रहा Orkut एक बार फिर चर्चा में है. करीब 12 साल पहले बंद हो चुके इस प्लेटफॉर्म के फाउंडर Orkut Buyukkokten अब एक नए सोशल नेटवर्क की दिशा में लोगों का समर्थन जुटा रहे हैं. हालांकि अभी इसे Orkut की आधिकारिक वापसी कहना जल्दबाजी होगी.
Orkut को जनवरी 2004 में Google के इंजीनियर Orkut Buyukkokten ने बनाया था. इसका नाम भी उन्होंने अपने नाम पर ही रखा था. शुरुआती दौर में इसे Google के इंटर्नल प्रोजेक्ट के तौर पर तैयार किया गया था. भारत और ब्राजील में Orkut को खास तौर पर काफी लोकप्रियता मिली. उस समय सोशल मीडिया का अनुभव आज के Instagram और Facebook से काफी अलग था.
Orkut पर यूजर्स अपनी प्रोफाइल बनाते थे, दोस्तों को जोड़ते थे और अलग-अलग कम्युनिटी का हिस्सा बनते थे. इसकी सबसे खास चीजों में से एक थी Scrap. यूजर्स एक-दूसरे की प्रोफाइल पर सार्वजनिक संदेश छोड़ते थे, जिन्हें Scrap कहा जाता था. इसके अलावा दोस्त एक-दूसरे के लिए Testimonials भी लिखते थे. फिल्मों, संगीत, कॉलेज, शहरों और अलग-अलग रुचियों से जुड़ी कम्युनिटी में लोग बातचीत करते थे.
The internet should help us find our people. Friendship. Community. A place to belong. Help me bring Orkut back in that spirit. Add your name at https://t.co/FO48fJMjEq and share your supporter card with someone you want to bring along. Love, Orkut https://t.co/zesE18Y3Fd
— Orkut Buyukkokten (@orkut) October 8, 2026Also Read
लेकिन समय के साथ Facebook और दूसरे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ज्यादा लोकप्रिय होते गए. इसके बाद Google ने सितंबर 2014 में Orkut को बंद कर दिया. हालांकि, Orkut.com से जुड़े ट्रेडमार्क और अधिकार इसके फाउंडर के पास रहे.
अब करीब 12 साल बाद Orkut Buyukkokten ने एक नए सोशल नेटवर्क के लिए लोगों से समर्थन मांगा है. उनका उद्देश्य ऐसा इंटरनेट तैयार करना है, जहां लाइक, व्यूज और एल्गोरिदम से ज्यादा महत्व असली लोगों, दोस्ती और कम्युनिटी को मिले. उनका मानना है कि सोशल मीडिया का मूल उद्देश्य लोगों को जोड़ना था, लेकिन आज कई प्लेटफॉर्म यूजर्स का ध्यान ज्यादा समय तक बनाए रखने पर केंद्रित हो गए हैं.
Orkut के फाउंडर ने AI से तैयार कंटेंट, बॉट्स और नकली तस्वीरों या वीडियो के बढ़ते इस्तेमाल को लेकर भी चिंता जताई है. उनका कहना है कि इससे यह पहचानना मुश्किल हो सकता है कि स्क्रीन के दूसरी तरफ असली इंसान है या नहीं. हालांकि, वह AI के खिलाफ नहीं हैं. उनका मानना है कि AI का इस्तेमाल लोगों की जगह लेने के बजाय नए दोस्त बनाने, पुराने दोस्तों को खोजने और सही कम्युनिटी से जुड़ने में मदद के लिए किया जाना चाहिए.
फिलहाल Orkut की पुरानी वेबसाइट और पुराने अकाउंट दोबारा शुरू नहीं हुए हैं. आधिकारिक वेबसाइट पर चल रहे अभियान के जरिए लोगों से नए सोशल नेटवर्क के विचार पर समर्थन मांगा जा रहा है. लोग अपना नाम दर्ज कराकर सपोर्टर कार्ड भी पा सकते हैं. लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि पुराने अकाउंट वापस मिल जाएंगे या किसी यूजर का पुराना यूजरनेम सुरक्षित हो गया है.
इस अभियान को कई देशों से प्रतिक्रिया मिल रही है. उपलब्ध जानकारी के मुताबिक 115 देशों के लोगों से 2.6 लाख से ज्यादा सपोर्ट दर्ज किए जा चुके थे. यह आंकड़ा Orkut को लेकर लोगों की दिलचस्पी जरूर दिखाता है, लेकिन इससे नए सोशल नेटवर्क की सफलता की गारंटी नहीं मिलती.
Orkut की वापसी की चर्चा में मिलेनियल्स की पुरानी यादों का बड़ा योगदान है. उस दौर में सोशल मीडिया पर ट्रेंडिंग रील्स और एल्गोरिदम से ज्यादा दोस्तों और कम्युनिटी के साथ बातचीत पर जोर था. अब देखना होगा कि क्या Orkut का नया आइडिया पुराने यूजर्स की यादों को एक नए डिजिटल अनुभव में बदल पाता है. फिलहाल यह कहना सही होगा कि Orkut वापस आ गया है नहीं, बल्कि उसके फाउंडर एक नए सोशल नेटवर्क की नींव रखने की कोशिश कर रहे हैं.