सरकार हाई-एंड मोबाइल फोन बनाने के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले अहम कंपोनेंट्स के इम्पोर्ट शुल्क को कम कर सकती है. अगर ऐसा होता है तो एप्पल जैसी कंपनियों को काफी फायदा हो सकता है. मिनिस्ट्री ऑफ इलेक्ट्रॉनिक्स एंड इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी (Meity) ने वित्त मंत्रालय से मांग की थी कि बजट सत्र 2023 में मोबाइल फोन कंपोनेंट्स की इम्पोर्ट ड्यूटी को कम किया जाए. इनमें सेल, माइक, चार्जर, सर्किट बोर्ड असेंबली आदि कंपोनेंट्स शामिल हैं.
ऐसे में सरकार भारत में हाई-एंड फोन प्रोडक्शन में इस्तेमाल होने वाले अहम कंपोनेंट्स के इम्पोर्ट शुल्क को कम कर सकती है. इसका सीधा उद्देश्य देश में प्रोडक्शन और एक्सपोर्ट को बढ़ाना है. इस कदम की मांग इंडस्ट्री के कई प्लेयर्स काफी समय से कर रहे थे. इस कदम का उद्देश्य चीन और वियतनाम जैसे रीजनल कॉम्पेटीटर्स के साथ एक लेवल पर आकर कॉम्पेटीशन करना है.
इंडिया सेल्युलर एंड इलेक्ट्रॉनिक्स एसोसिएशन (ICEA) से मिली जानकारी के मुताबिक, कैमरा मॉड्यूल और चार्जर समेत मोबाइल फोन कंपोनेंट्स पर इम्पोर्ट ड्यूटी 2.5 प्रतिशत से 20 प्रतिशत तक है. अब यह कितनी कम होगी, यह तो बजट के बाद ही पता चलेगा.
कंपनियों को क्या होगा फायदा:
जब फोन पार्ट्स पर इम्पोर्ट ड्यूटी कम लगाई जाएगी तो फोन की लागत भी अपने आप कम हो जाएगी. ऐसे में विदेशी कंपनियां ज्यादा से ज्यादा फैक्ट्री भारत में लगाएंगी. इससे होगा यह कि भारत में बड़े लेवल पर फोन बनाए जा सकेंगे.
जब फोन भारत में बनेंगे तो इसकी कॉस्ट तो कम होगी ही और साथ ही इसे बाकी देशों में भी एक्सपोर्ट किया जा सकेगा. अगर ऐसा होगा तो भारत जल्द ही मोबाइल मैन्युफैक्चरिंग का हब बन जाएगा.
चीन और वियतनाम का दबदबा होगा कम:
भारत के हब बनने से चीन और वियतनाम का दबदबा खत्म हो जाएगा. यहां की प्रोडक्शन कॉस्ट बहुत ज्यादा होती है तो कंपनियां भारत का रुख करेंगी. वर्तमान की बात करें तो चीन का औसत टैरिफ 3.7% है तो भारत का 8.5% है.