नई दिल्ली: आजकल फेक फोटोज और वीडियोज का दौर चल रहा है, या यूं कहें कि एआई फोटो-वीडियोज का दौर चल रहा है. एआई इस समय फेक फोटोज और वीडियोज बनाने में महारथी हो गया है. इसने सच और भ्रम के बीच की पतली सी लाइन को और भी धुंधला कर दिया है. यह स्थिति और भी खतरनाक तब हो जाती है, जब आपके सामने कोई फेक फोटो हो और आप उसे सच मान लें, क्योंकि उसे बनाया ही इतना रिएलिस्टिक गया होता है.
इस तरह का एक मामला सामने आया है, जो उत्तराखंड का है. दरअसल, उत्तराखंड के प्रसिद्ध धार्मिक स्थल कैंची धाम को लेकर एक फोटो ने यूजर्स को बेहद ही असमंजस में डाल दिया है. सोशल मीडिया पर इन दिनों मंदिर परिसर की कुछ तस्वीरें तेजी से वायरल हुईं, जिनमें पूरा धाम बर्फ की मोटी सफेद परत से ढका दिखाई दे रहा था. यहां की सीढ़ियां, पेड़ और आसपास का सभी कुछ एक हिल स्टेशन जैसा लग रहा है. इन तस्वीरों को देख लोग कई तरह के रिएक्शन दे रहे हैं. लोगों ने शेयर किया कैंची धाम में बर्फबारी का दृश्य.
पवित्र कैंची धाम का दृश्य ---- pic.twitter.com/zUEF1mQAtZ
— Amitabh Agnihotri (@Aamitabh2) January 24, 2026
बता दें कि ये तस्वीरें प्रकृति का कोई करिश्मा नहीं, बल्कि AI तकनीक द्वारा तैयार किया गया एक भ्रम है. एडवांस सॉफ्टवेयर और टूल्स की मदद से इस तरह का दृश्य बनाया गया है. इससे यह साफ होता है कि किस तरह से डीपफेक और AI जनरेटेड कंटेंट लोगों की भावनाओं और आस्था के साथ खेल सकता है. कई लोग इन फोटोज को देख कैंची धाम जाने का प्लान कर रहे हैं. लेकिन स्थानीय प्रशासन ने लोगों से अपील करते हुए कहा है कि वो इस तरह की फोटो और वीडियो पर आंख बंद कर भरोसा न करें. साथ ही कैंची धाम आने से पहले वहां के मौसम की जानकारी को अच्छे से चेक कर लें.
आज का समय एआई का है और इस समय लोगों के लिए सतर्क रहना बेहद जरूरी हो गया है. किसी भी फोटो पर यकीन करने से पहले आपको उसकी पूरी जांच करनी चाहिए. इसके लिए कई टूल्स भी बनाए गए हैं, जिनमें से एक गूगल रिवर्स इमेज… इस पर किसी भी इमेज को डालकर यह चेक किया जा सकता है कि इस इमेज की सच्चाई क्या है.
इसके अलावा मौसम से जुड़ी आधिकारिक वेबसाइट या स्थानीय समाचार स्रोतों से जानकारी लेकर भी भ्रम से बचा जा सकता है. AI से बनी फोटोज में अक्सर कुछ संकेत छिपे होते हैं, जिसमें एजेज क्लियर नहीं होते, कोई भी चीज जरूरत से ज्यादा होती है. कैंची धाम की बात करें तो इसकी एआई जनरेटेड फोटो में जरूरत से ज्यादा और इमबैलेंस बर्फ, मंदिर का अलग स्ट्रक्चर शामिल है.
इस फोटो में आप यह चेक कर सकते हैं कि जब बर्फबारी होती है तो पेड़ों की टहनियां बर्फ के वजन से झुक जाती हैं. जबकि इसमें ऐसा नहीं है. AI फोटोज में बर्फ रुई जैसी हल्की और समान रूप से जमी दिखाई दे रही है. साथ ही आस-पास लोग भी नहीं दिखाई दे रहे हैं. इन छोटे-छोटे संकेतों पर ध्यान देकर हम तकनीक के इस मायाजाल से खुद को बचा सकते हैं.