नई दिल्ली: भारत में सोलर पैनल को लेकर अक्सर यह भ्रम रहता है कि बारिश या सर्दी के मौसम में यह बिजली बनाना बंद कर देता है. लेकिन ऐसा नहीं है. सोलर पैनल बिजली बनाने के लिए सूरज की रोशनी का इस्तेमाल करते हैं, गर्मी का नहीं. इसलिए बादल, बारिश और ठंड के दौरान भी पैनल बिजली बनाते रहते हैं. हालांकि रोशनी कम होने पर बिजली उत्पादन में कमी जरूर आती है.
सोलर पैनल फोटोवोल्टिक यानी PV तकनीक पर काम करते हैं. इसमें सूर्य की रोशनी को सीधे विद्युत ऊर्जा में बदला जाता है. खास बात यह है कि बहुत ज्यादा गर्मी पैनल की दक्षता को कम कर सकती है. इसके मुकाबले ठंडे मौसम में पर्याप्त धूप मिलने पर सोलर सेल बेहतर दक्षता से काम कर सकते हैं. यानी ठंड अपने आप में सोलर पैनल के लिए समस्या नहीं है.
बारिश और घने बादलों के दौरान सूर्य की सीधी रोशनी कम हो जाती है. ऐसे में पैनल बिजली बनाते हैं लेकिन सामान्य दिनों की तुलना में उत्पादन काफी कम हो सकता है. उदाहरण के लिए 3 किलोवाट का रूफटॉप सोलर सिस्टम सामान्य परिस्थितियों में रोज करीब 10 से 12 यूनिट बिजली बना सकता है. वहीं मानसून के बेहद खराब मौसम में इसका उत्पादन घटकर करीब 4 से 5 यूनिट तक पहुंच सकता है. वास्तविक उत्पादन स्थान, मौसम, पैनल की क्षमता और धूप की उपलब्धता पर निर्भर करता है.
बारिश का एक फायदा यह भी है कि पानी पैनलों की सतह पर जमी धूल और गंदगी को काफी हद तक साफ कर देता है. गर्मी और शुष्क मौसम में पैनलों पर धूल की परत जमने से सूर्य की रोशनी कम पहुंचती है और उत्पादन प्रभावित होता है. बारिश के बाद जब आसमान साफ होता है, तो साफ पैनल बेहतर तरीके से धूप को ग्रहण कर सकते हैं.
सर्दियों में भी सोलर पैनल लगातार काम करते हैं. हालांकि कोहरा, धुंध, कम दिन और सूर्य की तिरछी किरणों के कारण रोजाना मिलने वाली कुल धूप कम हो सकती है. इससे दैनिक बिजली उत्पादन घट सकता है. दूसरी तरफ ठंडा तापमान पैनल की दक्षता के लिए अनुकूल हो सकता है.