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India Daily

क्या ChatGPT सच में बना रहा है फर्जी आधार कार्ड? वायरल दावे की पड़ताल में सामने आया चौंकाने वाला सच

चैटजीपीटी के नए इमेज टूल द्वारा फर्जी सरकारी पहचान पत्र बनाने के दावों की सच्चाई अब सबके सामने आ गई है. पड़ताल में यह स्पष्ट हुआ है कि सुरक्षा नीतियों के चलते एआई ऐसे दस्तावेज बनाने से साफ मना कर देता है.

KanhaiyaaZee
क्या ChatGPT सच में बना रहा है फर्जी आधार कार्ड? वायरल दावे की पड़ताल में सामने आया चौंकाने वाला सच
Courtesy: Social Media

नई दिल्ली: टेक्नोलॉजी के इस दौर में ओपन एआई का नया इमेज 2.0 टूल इन दिनों जबरदस्त चर्चा का विषय बना हुआ है. अपनी अद्भुत रचनात्मकता के कारण वायरल हो रहे इस टूल को लेकर सोशल मीडिया पर एक डरावना दावा किया जा रहा है. कहा जा रहा है कि यह टूल हूबहू असली दिखने वाले नकली आधार और पैन कार्ड तैयार कर रहा है. इस खबर ने डिजिटल सुरक्षा को लेकर लोगों के मन में गहरी चिंता पैदा कर दी है. आइए जानते हैं इसकी पूरी हकीकत.

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर हाल ही में एक यूजर ने यह सनसनीखेज दावा किया कि ChatGPT का नया इमेज टूल फर्जी सरकारी पहचान पत्र तैयार कर रहा है. इस खबर के फैलते ही आम जनता और सुरक्षा एजेंसियों में डिजिटल धोखाधड़ी का डर समा गया. यूजर ने तर्क दिया कि इन नकली कार्ड्स का उपयोग फ्रॉड के लिए किया जा सकता है, जिससे वित्तीय सुरक्षा को बड़ा खतरा है. इस वायरल पोस्ट ने एआई की नैतिकता और सुरक्षा मापदंडों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं.

सच्चाई की पड़ताल में खुला राज 

इस दावे की सत्यता परखने के लिए जब सीधे तौर पर 'नकली आधार कार्ड' बनाने का आदेश एआई को दिया गया. तो उसने साफ मना कर दिया. टाइम्स नाउ टेक की रिपोर्ट बताती है कि एआई टूल ने इसे अपनी सुरक्षा नीतियों के विरुद्ध बताया. उसने जवाब दिया कि आधार UIDAI द्वारा जारी एक आधिकारिक दस्तावेज है और इसे सिस्टम के बाहर बनाना गैर-कानूनी है. इस प्रतिक्रिया से स्पष्ट हुआ कि एआई को सुरक्षा के कड़े घेरे में रखा गया है ताकि किसी भी तरह का दुरुपयोग न हो.

सुरक्षा नीतियों की मजबूत दीवार 

एक्सपेरिमेंट के दौरान एक और कोशिश की गई. जिसमें एआई को एक डमी फोटो देकर उसमें असली व्यक्ति का नाम या फोटो बदलने को कहा गया. एआई ने इस चालाकी भरे अनुरोध को भी सिरे से खारिज कर दिया. तमाम रिसर्च के बाद यह पाया गया कि चैट जीपीटी आधिकारिक तौर पर ऐसे किसी भी दस्तावेज को बनाने में कोई मदद नहीं करता है. एआई मॉडल को प्रशिक्षित किया गया है कि वह उन कार्यों से दूर रहे जो कानून का उल्लंघन करते हों. उसकी प्रोग्रामिंग में सुरक्षा ही प्राथमिकता है.

अफवाहों और भ्रामक खबरों का अंत 

गहन पड़ताल का नतीजा यह निकला कि सोशल मीडिया पर चल रही खबरें पूरी तरह बढ़ा-चढ़ाकर पेश की गई हैं. चैट जीपीटी एक रचनात्मक टूल है जो फोटो और पोस्टर बनाने में सक्षम है. लेकिन यह सरकारी पहचान पत्रों की नकल नहीं कर सकता. कुछ यूजर्स द्वारा फैलाई गई यह जानकारी केवल एक अफवाह साबित हुई है. यह मामला दर्शाता है कि कैसे डिजिटल युग में तकनीक के बारे में गलत सूचनाएं बहुत तेजी से फैलती हैं और लोगों के बीच बेवजह का तनाव पैदा कर देती हैं.