नई दिल्ली: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जिस तेजी से आगे बढ़ रहा है, उसने दुनिया के सामने नई संभावनाओं के साथ कई सवाल भी खड़े कर दिए हैं. माइक्रोसॉफ्ट के सह संस्थापक बिल गेट्स ने चेताया है कि सरकारें AI से आने वाले बड़े बदलावों के लिए उतनी तैयार नहीं हैं, जितनी उन्हें होना चाहिए. उनका कहना है कि इसका असर नौकरियों, साइबर सुरक्षा और लोगों की आदतों तक दिखाई दे सकता है.
AI को लेकर यह बहस ऐसे समय तेज है, जब तकनीकी कंपनियां ज्यादा शक्तिशाली मॉडल बनाने की होड़ में हैं. वहीं, कुछ बड़े टेक नाम इसके विकास की रफ्तार पर विचार करने की बात कह रहे हैं. दूसरी ओर, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का रुख है कि अमेरिका AI की गति कम नहीं कर सकता, क्योंकि इससे चीन को बढ़त मिल सकती है. इसी बीच गेट्स ने चीन की AI क्षमता की भी तारीफ की है.
रॉयटर्स को दिए इंटरव्यू में गेट्स ने कहा कि सरकारें AI से होने वाले बदलावों की तैयारी में पीछे हैं. उन्होंने नौकरियों पर असर, साइबर हमलों के बढ़ते खतरे और AI आधारित डिजिटल साथियों से लोगों के जरूरत से ज्यादा जुड़ने की आशंका जताई. उनका मानना है कि AI के फायदे देखने के साथ उसके संभावित नुकसान से निपटने की तैयारी भी जरूरी है.
गेट्स के मुताबिक अमेरिका और चीन दोनों के पास ऐसे संस्थान हैं, जो बेहतरीन AI मॉडल तैयार करने में सक्षम हैं. उन्होंने दोनों देशों के सबसे अच्छे मॉडल के बीच अंतर को बहुत ज्यादा नहीं बताया. इस प्रतिस्पर्धा का असर केवल तकनीक पर नहीं, बल्कि कारोबार, सुरक्षा, नौकरियों और वैश्विक राजनीति पर भी पड़ सकता है.
गेट्स का कहना है कि AI का लाभ केवल अमीर देशों और बड़ी कंपनियों तक सीमित नहीं रहना चाहिए. गेट्स फाउंडेशन अगले दो वर्षों में कम से कम 1 अरब डॉलर खर्च करने की योजना बना रहा है. यह रकम स्वास्थ्य, शिक्षा और खेती में AI की पहुंच बढ़ाने तथा उन भाषाओं और क्षेत्रों के लिए बेहतर तकनीक विकसित करने में इस्तेमाल होगी.
AI के भविष्य को समझाते हुए गेट्स ने फिल्मों में दिखाए जाने वाले एलियन का उदाहरण दिया. उनका कहना है कि किसी बाहरी खतरे के सामने देश अपने मतभेद भूलकर एकजुट हो जाते हैं. उनके मुताबिक AI भी दुनिया के लिए कुछ ऐसा ही मौका है. अमेरिका, चीन और दूसरे देशों को प्रतिस्पर्धा के साथ मिलकर ऐसे नियम बनाने होंगे, जो इसके गलत इस्तेमाल को रोक सकें.