स्मार्ट मीटर लगाने के बाद अधिक बिजली बिल आने की शिकायतों के बीच बिजली उपभोक्ताओं को राहत देने वाला फैसला लिया गया है. अब जिन घरों में स्मार्ट मीटर लगाए जा रहे हैं, वहां उपभोक्ता चाहें तो पुराने बिजली मीटर को कुछ समय तक चेक मीटर के रूप में भी लगाए रख सकेंगे. इससे नए और पुराने मीटर की रीडिंग का मिलान किया जा सकेगा और यदि उपभोक्ता बिल से संतुष्ट होंगे, तभी पुराने मीटर को हटाया जाएगा.
ऊर्जा निगम की समीक्षा बैठक में जिलाधिकारी ललित मोहन रयाल ने अधिकारियों को इस संबंध में आवश्यक निर्देश दिए. उन्होंने कहा कि स्मार्ट मीटर को लेकर लोगों की शंकाओं का समाधान करना जरूरी है ताकि उपभोक्ताओं का भरोसा बना रहे और किसी तरह की गलतफहमी न हो.
बैठक के दौरान अधिकारियों ने बताया कि कई उपभोक्ता स्मार्ट मीटर लगने के बाद बिजली बिल में बढ़ोतरी की शिकायत कर रहे हैं. इसे देखते हुए जिलाधिकारी ने निर्देश दिया कि पुराने मीटर को अस्थायी रूप से चेक मीटर के रूप में लगाए रखने की सुविधा दी जाए. इससे उपभोक्ता दोनों मीटरों की रीडिंग का मिलान कर सकेंगे और बिल की सटीकता की पुष्टि होने के बाद ही पुराने मीटर को हटाया जाएगा. प्रशासन का मानना है कि इस व्यवस्था से स्मार्ट मीटर को लेकर लोगों की आशंकाएं कम होंगी और बिलिंग प्रक्रिया में पारदर्शिता आएगी.
समीक्षा बैठक में ऊर्जा निगम के अधिकारियों ने जिले में स्मार्ट मीटर लगाने की प्रगति की जानकारी भी दी. अधिकारियों के अनुसार, हल्द्वानी नगर खंड में 49.5 प्रतिशत, ग्रामीण खंड में 35.8 प्रतिशत, रामनगर में 55.67 प्रतिशत और नैनीताल क्षेत्र में 38.4 प्रतिशत स्मार्ट मीटर लगाए जा चुके हैं. जिलाधिकारी ने इन आंकड़ों की समीक्षा करते हुए स्मार्ट मीटर लगाने की गति तेज करने और उपभोक्ताओं से मिलने वाली शिकायतों का समयबद्ध समाधान सुनिश्चित करने के निर्देश दिए.
बैठक में आरडीएसएस योजना के तहत चल रहे कार्यों की धीमी प्रगति पर जिलाधिकारी ने नाराजगी जताई. उन्होंने अधिकारियों को कार्यों में तेजी लाने के साथ नियमित स्थलीय निरीक्षण करने के निर्देश दिए. इसके अलावा मुख्यमंत्री हेल्पलाइन पर दर्ज बिजली संबंधी शिकायतों का 30 दिन के भीतर निस्तारण सुनिश्चित करने को कहा गया. बिजली चोरी पर रोक लगाने के लिए नियमित जांच अभियान चलाने के भी निर्देश दिए गए. बैठक में ऊर्जा निगम के वरिष्ठ अधिकारियों सहित संबंधित विभागों के अधिकारी मौजूद रहे.