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कैंची धाम से त्रियुगीनारायण तक क्या होने वाला है खास? ₹514 करोड़ की योजना ने बढ़ाई उत्सुकता

उत्तराखंड भाजपा ने जानकारी दी है कि राज्य के प्रमुख धार्मिक और पर्यटन स्थलों के विकास के लिए ₹514 करोड़ का विशेष बजट खर्च किया जा रहा है.

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Edited By: Reepu Kumari
कैंची धाम से त्रियुगीनारायण तक क्या होने वाला है खास? ₹514 करोड़ की योजना ने बढ़ाई उत्सुकता
Courtesy: @BJP4UK

उत्तराखंड के धार्मिक और पर्यटन स्थलों को नई पहचान देने की दिशा में बड़ा कदम उठाया जा रहा है. राज्य के कई प्रसिद्ध आस्था केंद्रों और पर्यटन स्थलों के विकास के लिए विशेष बजट का प्रावधान किया गया है. इससे आने वाले समय में श्रद्धालुओं और पर्यटकों को बेहतर सुविधाएं मिलने की उम्मीद है. बीजेपी उत्तराखंड ने अपने आधिकारिक एक्स हैंडल पर जानकारी साझा करते हुए बताया कि ₹514 करोड़ की योजना के माध्यम से राज्य के प्रमुख धार्मिक स्थलों का कायाकल्प किया जाएगा. इसके तहत परंपरा और आधुनिक सुविधाओं के बीच संतुलन बनाते हुए विकास कार्यों को आगे बढ़ाया जाएगा.

आस्था केंद्रों को मिलेगी नई पहचान

योजना के तहत बाबा नीम करौली से जुड़े प्रसिद्ध कैंची धाम सहित कई प्रमुख धार्मिक स्थलों पर सुविधाओं का विस्तार किया जाएगा. श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या को देखते हुए बेहतर व्यवस्थाओं पर विशेष ध्यान दिया जाएगा. इससे यात्रियों को अधिक सुगम और सुविधाजनक अनुभव मिलने की संभावना है.

पर्यटन और धार्मिक यात्रा को मिलेगा बढ़ावा

कार्तिक स्वामी मंदिर समेत अन्य महत्वपूर्ण स्थलों पर भी आधारभूत सुविधाओं को मजबूत करने की तैयारी है. राज्य सरकार का उद्देश्य धार्मिक पर्यटन को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाना है. बेहतर व्यवस्थाओं के जरिए देश और विदेश से आने वाले पर्यटकों को आकर्षित करने की दिशा में प्रयास किए जा रहे हैं.

त्रियुगीनारायण धाम पर विशेष फोकस

योजना का एक महत्वपूर्ण हिस्सा त्रियुगीनारायण धाम को विशेष पहचान दिलाना भी है. भाजपा उत्तराखंड के अनुसार इस स्थल को दुनिया के सबसे खूबसूरत वेडिंग डेस्टिनेशन के रूप में विकसित करने की दिशा में काम किया जाएगा. इससे स्थानीय पर्यटन गतिविधियों को नई गति मिलने की उम्मीद है.

विकास और परंपरा का संगम

भाजपा ने कहा कि उत्तराखंड में विकास कार्यों के साथ सनातन परंपराओं के संरक्षण को भी प्राथमिकता दी जा रही है. धार्मिक महत्व वाले स्थलों को आधुनिक सुविधाओं से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है ताकि श्रद्धालुओं को बेहतर अनुभव मिल सके. यह पहल राज्य की सांस्कृतिक पहचान और पर्यटन क्षमता दोनों को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है.