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आपदा आए तो घबराए नहीं, उत्तराखंड के 80 हजार लोग सीखेंगे भूकंप से बाढ़ तक बचाव के गुर

उत्तराखंड सरकार ने चालू वित्तीय वर्ष में 80 हजार लोगों को समुदाय आधारित आपदा प्रबंधन का प्रशिक्षण देने का लक्ष्य रखा है. अब तक 2,69,622 लोगों को प्रशिक्षण दिया जा चुका है.

Km Jaya
Edited By: Km Jaya
आपदा आए तो घबराए नहीं, उत्तराखंड के 80 हजार लोग सीखेंगे भूकंप से बाढ़ तक बचाव के गुर
Courtesy: Pinterest

देहरादून: आपदा के लिहाज से संवेदनशील उत्तराखंड में सरकार ने आम लोगों को आपदा से निपटने के लिए तैयार करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है. चालू वित्तीय वर्ष में प्रदेशभर के 80 हजार लोगों को आपदा प्रबंधन का प्रशिक्षण देने का लक्ष्य रखा गया है. यह प्रशिक्षण समुदाय आधारित होगा, जिसमें ग्रामीणों, युवाओं, विद्यार्थियों, शिक्षकों, स्वयंसेवी समूहों और स्थानीय संगठनों को आपदा से पहले तैयारी और आपात स्थिति में बचाव के जरूरी तरीके सिखाए जाएंगे.

उत्तराखंड में भूकंप, भूस्खलन, बादल फटना, बाढ़, हिमस्खलन, शीतलहर और जंगल की आग जैसी प्राकृतिक आपदाओं का खतरा बना रहता है. पहाड़ी क्षेत्रों में कई बार आपदा आने के बाद राहत और बचाव दलों को प्रभावित स्थान तक पहुंचने में समय लगता है. ऐसे में स्थानीय लोगों को पहले से प्रशिक्षित करना काफी मददगार साबित हो सकता है. प्रशिक्षित लोग शुरुआती समय में सुरक्षित निकासी, प्राथमिक उपचार और अन्य जरूरी कदम उठा सकते हैं.

अब तक कितने लोगों को दिया जा चुका है प्रशिक्षण?

उत्तराखंड राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण ने वर्ष 2020 में जिलों के समन्वय से समुदाय आधारित आपदा प्रबंधन प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू किया था. इसके बाद अब तक प्रदेश में 2,69,622 लोगों को प्रशिक्षण दिया जा चुका है. प्रशिक्षण हासिल करने वालों में स्कूल और कॉलेज के विद्यार्थी, शिक्षक, स्थानीय समुदाय, स्वयंसेवी संगठन, महिला मंगल दल, युवक मंगल दल और विभिन्न संस्थानों के प्रतिनिधि शामिल हैं.

प्रशिक्षण का क्या है उद्देश्य?

इस प्रशिक्षण की अवधि सामान्य तौर पर तीन से पांच दिन रखी जाती है. इसमें आपदा से पहले की तैयारी, सुरक्षित व्यवहार, प्राथमिक उपचार, खोज और बचाव, सुरक्षित निकासी प्रक्रिया तथा चेतावनी संदेशों को समझने की जानकारी दी जाती है. प्रशिक्षण का उद्देश्य लोगों को केवल आपदा के दौरान प्रतिक्रिया देने के लिए तैयार करना नहीं, बल्कि आपदा से पहले जोखिम को कम करने के उपायों से भी परिचित कराना है.

सरकार का विशेष जोर ग्रामीण क्षेत्रों और युवाओं को प्रशिक्षण से जोड़ने पर है. पहाड़ी गांवों में स्थानीय लोगों की भूमिका आपदा के समय बेहद महत्वपूर्ण हो सकती है. यदि उन्हें जरूरी कौशल की जानकारी हो तो राहत और बचाव दलों के पहुंचने से पहले कई महत्वपूर्ण कदम उठाए जा सकते हैं.

आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास मंत्री ने क्या कहा?

आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास मंत्री मदन कौशिक ने कहा कि आपदा प्रबंधन को केवल सरकारी तंत्र तक सीमित नहीं रखा जा सकता. इसमें समुदाय की सक्रिय भागीदारी जरूरी है. इसी उद्देश्य से इस वर्ष 80 हजार लोगों को प्रशिक्षण देने का लक्ष्य रखा गया है. सरकार का मानना है कि जागरूक और प्रशिक्षित समुदाय आपदा के समय जान-माल के नुकसान को कम करने में अहम भूमिका निभा सकता है.