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अब साइबर ठगों की खैर नहीं! उत्तराखंड में बन रहा हाईटेक S4C सेंटर, 1930 हेल्पलाइन भी होगी और तेज

उत्तराखंड सरकार साइबर अपराधों पर नियंत्रण के लिए स्टेट साइबर क्राइम कोआर्डिनेशन सेंटर की स्थापना की प्रक्रिया तेज कर रही है. इससे साइबर ठगी की जांच, पीड़ितों को राहत और पुलिस तंत्र के बीच समन्वय को मजबूती मिलेगी.

Kuldeep Sharma
Edited By: Kuldeep Sharma
अब साइबर ठगों की खैर नहीं! उत्तराखंड में बन रहा हाईटेक S4C सेंटर, 1930 हेल्पलाइन भी होगी और तेज
Courtesy: ai generated

उत्तराखंड में लगातार बढ़ रहे साइबर अपराधों को देखते हुए राज्य सरकार ने सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है. सरकार जल्द ही स्टेट साइबर क्राइम कोआर्डिनेशन सेंटर (S4C) स्थापित करने जा रही है, जिससे साइबर ठगी के मामलों की निगरानी, जांच और पीड़ितों को त्वरित सहायता उपलब्ध कराने की प्रक्रिया अधिक प्रभावी होगी. इसके साथ ही पुलिस की तकनीकी क्षमता बढ़ाने और आम लोगों में जागरूकता फैलाने पर भी विशेष जोर दिया जा रहा है.

साइबर अपराधों पर नियंत्रण के लिए बनेगा मजबूत तंत्र

मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन ने गृह विभाग और पुलिस अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक में एस4सी को जल्द अधिसूचित करने के निर्देश दिए. उन्होंने कहा कि इस केंद्र के शुरू होने से केंद्र सरकार, राज्य पुलिस और जिला स्तर की एजेंसियों के बीच बेहतर तालमेल स्थापित होगा. इससे साइबर अपराधों की जांच तेज होगी और पीड़ितों को समय रहते सहायता मिल सकेगी. बैठक में प्रदेश के सभी साइबर पुलिस स्टेशनों को आधुनिक संसाधनों और तकनीकी सुविधाओं से सुसज्जित करने पर भी जोर दिया गया, ताकि डिजिटल अपराधों से प्रभावी तरीके से निपटा जा सके.

हेल्पलाइन और ई-जीरो एफआईआर प्रणाली होगी और मजबूत

बैठक में 1930 साइबर हेल्पलाइन की कार्यक्षमता बढ़ाने के लिए कॉल सेंटर में पर्याप्त मानव संसाधन उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए. साथ ही ई-जीरो एफआईआर प्रणाली को और अधिक प्रभावी बनाने पर भी जोर दिया गया. मुख्य सचिव ने कहा कि दर्ज होने वाली प्रत्येक ई-जीरो एफआईआर को नियमित एफआईआर में बदला जाए और उसे सीसीटीएनएस प्रणाली से जल्द जोड़ा जाए. इससे शिकायतों के निस्तारण में तेजी आएगी और जांच प्रक्रिया अधिक पारदर्शी व प्रभावी बनेगी.

जनजागरूकता और पुलिस प्रशिक्षण पर रहेगा विशेष फोकस

मुख्य सचिव ने कहा कि कई मामलों में लोग जानकारी के अभाव में समय पर शिकायत दर्ज नहीं करा पाते, जिससे साइबर ठगी की रकम वापस पाने की संभावना कम हो जाती है. उन्होंने शिकायत निवारण मॉड्यूल (GRM) और मनी रिस्टोरेशन मॉड्यूल के बारे में व्यापक जनजागरूकता अभियान चलाने के निर्देश दिए. मीडिया और सोशल मीडिया के माध्यम से लोगों को साइबर सुरक्षा के उपायों और ठगी होने पर तुरंत उठाए जाने वाले कदमों की जानकारी देने पर बल दिया गया. साथ ही पुलिस अधिकारियों की क्षमता बढ़ाने, साइबर कमांडो की संख्या में वृद्धि करने और सभी शिकायतों का तय समय में निस्तारण सुनिश्चित करने के भी निर्देश दिए गए.