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उत्तराखंड में ईको टूरिज्म को मिलेगा बड़ा बढ़ावा, जल्द लागू होगी नई ट्रेकिंग नीति

उत्तराखंड सरकार ईको टूरिज्म को बढ़ावा देने के लिए नई ट्रेकिंग नीति लाने की तैयारी में है.

Ashutosh
Edited By: Ashutosh Rai
उत्तराखंड में ईको टूरिज्म को मिलेगा बड़ा बढ़ावा, जल्द लागू होगी नई ट्रेकिंग नीति
Courtesy: X

उत्तराखंड में ईको टूरिज्म को नई दिशा देने की तैयारी शुरू हो गई है. राज्य सरकार नई ट्रेकिंग नीति लाने, नए ट्रेकिंग रूट खोलने और स्थानीय युवाओं को रोजगार से जोड़ने पर काम कर रही है. मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन ने अधिकारियों को कई अहम निर्देश देते हुए काम में तेजी लाने को कहा है.

नई ट्रेकिंग नीति पर तेजी से होगा काम

उत्तराखंड सरकार चाहती है कि राज्य में ईको टूरिज्म को संगठित तरीके से आगे बढ़ाया जाए. इसी उद्देश्य से मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन ने वन विभाग के अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक की. बैठक में उन्होंने नई ट्रेकिंग नीति को जल्द अंतिम रूप देने के निर्देश दिए. उन्होंने कहा कि अगले महीने इस नीति का प्रस्ताव कैबिनेट के सामने रखा जाए ताकि इसे जल्द लागू किया जा सके. सरकार का मानना है कि राज्य की प्राकृतिक सुंदरता और पहाड़ों का सही उपयोग करते हुए पर्यटन को बढ़ाया जा सकता है. साथ ही यह भी सुनिश्चित किया जाएगा कि पर्यटन गतिविधियों से पर्यावरण को किसी तरह का नुकसान न पहुंचे. नई चोटियों को ट्रेकिंग के लिए खोलने की प्रक्रिया भी तेजी से आगे बढ़ाई जाएगी.

ऑनलाइन बुकिंग और नई सुविधाओं पर जोर

सरकार ने ट्रेकिंग और वन विश्राम गृहों की बुकिंग व्यवस्था पूरी तरह ऑनलाइन करने का फैसला किया है. इससे तय क्षमता से अधिक बुकिंग नहीं होगी और पर्यटकों को भी सुविधा मिलेगी. मुख्य सचिव ने अधिकारियों को जबरखेत मॉडल की तरह विकसित किए जा रहे नौ ईको टूरिज्म स्थलों को अक्टूबर तक लोगों के लिए शुरू करने का लक्ष्य दिया. इसके साथ ही 31 चिन्हित ट्रेकिंग स्थलों, ईको कैंप और ईको हब के संचालन की जिम्मेदारी एक ही संस्था को देने की योजना तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं. सरकार चाहती है कि पूरी व्यवस्था बेहतर तरीके से चले और पर्यटकों को एक अच्छा अनुभव मिले.

स्थानीय युवाओं को मिलेगा रोजगार का मौका

सरकार ईको टूरिज्म को सिर्फ पर्यटन तक सीमित नहीं रखना चाहती, बल्कि इसे स्थानीय लोगों की कमाई का जरिया भी बनाना चाहती है. इसी सोच के तहत युवाओं के लिए नेचर गाइड ट्रेनिंग शुरू की जाएगी. इसके लिए एक स्थायी प्रशिक्षण केंद्र बनाया जाएगा और केंद्र सरकार के मानकों के अनुसार नया पाठ्यक्रम तैयार होगा. अक्टूबर में वन्यप्राणी सप्ताह के दौरान इस सर्टिफिकेशन कोर्स की शुरुआत की जाएगी. सरकार का मानना है कि प्रशिक्षित स्थानीय गाइड पर्यटकों को बेहतर जानकारी देंगे और इससे गांवों में रोजगार के नए अवसर भी बढ़ेंगे. बैठक में पर्यटन और वन विभाग के कई वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद रहे और योजनाओं को जल्द पूरा करने पर सहमति बनी.