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उत्तराखंड में SIR प्रक्रिया हुई आसान, अब आधार-राशन कार्ड से भी कर सकेंगे सत्यापन

प्रदेश भर में एसआईआर शिविर और निर्वाचन कार्यालयों में बड़ी संख्या में लोग पहुंच रहे हैं. कई मतदाताओं को नोटिस मिले हैं और वे दस्तावेजों को लेकर परेशान थे. पहले निर्धारित 11 दस्तावेजों में से कोई एक दिखाना जरूरी था.

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Edited By: Antima Pal
उत्तराखंड में SIR प्रक्रिया हुई आसान, अब आधार-राशन कार्ड से भी कर सकेंगे सत्यापन
Courtesy: X

देहरादून: उत्तराखंड में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर अभियान में मतदाताओं को बड़ी राहत मिली है. अब आधार कार्ड, राशन कार्ड और आयुष्मान कार्ड भी सत्यापन के लिए मान्य होंगे. इससे उन लोगों को आसानी होगी जिन्हें पुराने दस्तावेज जुटाने में दिक्कत आ रही थी.

उत्तराखंड में SIR प्रक्रिया हुई आसान

प्रदेश भर में एसआईआर शिविर और निर्वाचन कार्यालयों में बड़ी संख्या में लोग पहुंच रहे हैं. कई मतदाताओं को नोटिस मिले हैं और वे दस्तावेजों को लेकर परेशान थे. पहले निर्धारित 11 दस्तावेजों में से कोई एक दिखाना जरूरी था. लेकिन अब अगर इनमें से कोई उपलब्ध नहीं है तो मैप्ड मतदाता आधार, राशन या आयुष्मान कार्ड भी सहायक दस्तावेज के रूप में पेश कर सकते हैं.

अब आधार-राशन कार्ड से भी कर सकेंगे सत्यापन

मुख्य निर्वाचन अधिकारी डॉ. बीवीआरसी पुरुषोत्तम ने स्पष्ट किया है कि एसआईआर का मकसद किसी पात्र मतदाता का नाम काटना नहीं है. इसका उद्देश्य मतदाता सूची को शुद्ध, अपडेट और गलतियों से मुक्त बनाना है. उन्होंने कहा कि नोटिस पाने वाले मतदाताओं को घबराने की जरूरत नहीं है. वे निर्धारित समय के अंदर अपने बूथ लेवल ऑफिसर या नजदीकी निर्वाचन कार्यालय में पहुंचकर दस्तावेज जमा कर सकते हैं.

एसआईआर में पहली बार कई लोगों ने 'मैप्ड' और 'अनमैप्ड' शब्द सुने हैं. मैप्ड मतदाता वह है जिसका रिकॉर्ड सत्यापित हो चुका है और वह संबंधित पते, परिवार या मतदान केंद्र से जुड़ गया है. अनमैप्ड का मतलब है कि अभी सत्यापन बाकी है. दोनों ही मामलों में सत्यापन कराना जरूरी है.

मतदाताओं को सलाह दी गई है कि नोटिस को नजरअंदाज न करें. उपलब्ध दस्तावेजों के साथ बीएलओ या एसआईआर केंद्र पर जरूर पहुंचें. अगर 11 दस्तावेज नहीं हैं तो आधार, राशन कार्ड या आयुष्मान कार्ड साथ ले जाएं. मैप्ड या अनमैप्ड की स्थिति को लेकर भ्रमित होने की जरूरत नहीं. सबसे जरूरी है कि सत्यापन की प्रक्रिया पूरी कर ली जाए.

इस फैसले से लाखों मतदाताओं को राहत मिलेगी जो सरकारी दफ्तरों के चक्कर काट रहे थे. निर्वाचन विभाग का जोर है कि हर पात्र नागरिक का नाम सूची में बना रहे और गलत प्रविष्टियां हट जाएं. अभियान जारी है और लोग समय पर दस्तावेज जमा कर अपनी स्थिति साफ कर सकते हैं.