मानसून सीजन की शुरुआत के साथ उत्तराखंड सरकार ने संभावित प्राकृतिक आपदाओं से प्रभावी ढंग से निपटने की तैयारियों को अंतिम रूप देना शुरू कर दिया है. इसी क्रम में गुरुवार को पूरे प्रदेश में राज्य स्तरीय मेगा मॉक ड्रिल का आयोजन किया गया.
राज्य के 13 जिलों में 60 से अधिक संवेदनशील स्थानों पर बाढ़, भूस्खलन, बादल फटना, सड़क बंद होने और अन्य आपदा संबंधी काल्पनिक परिस्थितियां तैयार कर राहत एवं बचाव एजेंसियों की कार्यक्षमता का परीक्षण किया गया.
इस अभ्यास में राज्य आपदा प्रतिवादन बल (एसडीआरएफ), पुलिस, एनडीआरएफ, स्वास्थ्य विभाग, अग्निशमन सेवा, लोक निर्माण विभाग, राजस्व विभाग, रेडक्रॉस सहित विभिन्न एजेंसियों ने संयुक्त रूप से भाग लिया. अभ्यास का उद्देश्य विभिन्न विभागों के बीच समन्वय बढ़ाना और किसी भी वास्तविक आपदा की स्थिति में त्वरित एवं प्रभावी प्रतिक्रिया सुनिश्चित करना था.
मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड की भौगोलिक परिस्थितियां मानसून के दौरान चुनौतियां बढ़ा देती हैं. पर्वतीय क्षेत्रों में बादल फटना, भूस्खलन, अचानक बाढ़ और जलभराव जैसी घटनाओं का खतरा लगातार बना रहता है. ऐसे में आम नागरिकों, चारधाम यात्रियों, श्रद्धालुओं और पर्यटकों की सुरक्षा सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है. उन्होंने कहा कि पिछले वर्षों में आई आपदाओं से मिले अनुभवों को इस बार की रणनीति में शामिल किया गया है. मौसम विभाग की चेतावनियों के आधार पर समय रहते अलर्ट जारी किए जाएंगे, ताकि संभावित जोखिम को कम किया जा सके और जान-माल की हानि न्यूनतम रहे.
मॉक ड्रिल के दौरान देहरादून के लंबीधार-किमाड़ी मोटर मार्ग पर भूस्खलन का काल्पनिक दृश्य तैयार किया गया. अभ्यास के तहत एक बस के मलबे में दबने और एक अन्य वाहन के लगभग 35 मीटर गहरी खाई में गिरने की स्थिति बनाई गई. सूचना मिलते ही एसडीआरएफ, पुलिस और स्थानीय प्रशासन की टीमें तत्काल घटनास्थल पर पहुंचीं. संयुक्त अभियान चलाकर करीब 20 लोगों को सुरक्षित निकालने का अभ्यास किया गया. इस दौरान बचाव उपकरणों के उपयोग, घायलों को प्राथमिक उपचार देने और सुरक्षित स्थान तक पहुंचाने की प्रक्रिया को भी परखा गया.
उत्तरकाशी जिले में दो विकासखंडों के पांच संवेदनशील स्थानों पर विशेष मॉक ड्रिल आयोजित की गई. सुबह साढ़े नौ बजे सायरन बजते ही जिला प्रशासन ने इमरजेंसी रिस्पॉन्स सिस्टम सक्रिय किया. इसके बाद पुलिस, एसडीआरएफ, स्वास्थ्य, अग्निशमन, विद्युत, लोक निर्माण, जल संस्थान और राजस्व विभाग की टीमें आवश्यक संसाधनों के साथ मौके पर पहुंचीं. पूरे अभ्यास के दौरान जिला आपदा नियंत्रण कक्ष से लगातार निगरानी की गई.