उत्तराखंड में अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थानों की शिक्षा व्यवस्था को अधिक पारदर्शी, व्यवस्थित और आधुनिक बनाने की दिशा में सरकार ने महत्वपूर्ण कदम उठाया है. राज्य में बुधवार से मदरसा बोर्ड के स्थान पर उत्तराखंड अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण ने औपचारिक रूप से कार्यभार संभाल लिया है. इसके साथ ही प्रदेश के सभी 456 मदरसों की निगरानी अब केवल राज्य सरकार ही नहीं, बल्कि केंद्र सरकार के स्तर पर भी की जाएगी.
नई व्यवस्था का उद्देश्य अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थानों को राष्ट्रीय शिक्षा प्रणाली से जोड़ते हुए गुणवत्ता और जवाबदेही सुनिश्चित करना है. इसके तहत राज्य के सभी 456 मदरसों को यू-डायस नंबर आवंटित किए जा चुके हैं. इसके माध्यम से प्रत्येक मदरसे का शैक्षणिक, प्रशासनिक और आधारभूत ढांचे से जुड़ा पूरा विवरण शिक्षा मंत्रालय के डिजिटल पोर्टल पर दर्ज किया जाएगा.
उत्तराखंड अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण ने सभी मदरसों के लिए शैक्षणिक मान्यता प्राप्त करना अनिवार्य कर दिया है. नई व्यवस्था के अनुसार पहली से आठवीं कक्षा तक संचालित 400 मदरसों को संबंधित जिले के मुख्य शिक्षा अधिकारी कार्यालय से मान्यता लेनी होगी. वहीं, नौवीं से बारहवीं तक संचालित 56 मदरसों को उत्तराखंड विद्यालयी शिक्षा परिषद, रामनगर से संबद्धता प्राप्त करनी होगी. पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन माध्यम से संचालित की जाएगी, जिससे आवेदन और सत्यापन प्रक्रिया अधिक सरल और पारदर्शी बन सके.
प्राधिकरण के गठन के बाद मान्यता प्रक्रिया भी शुरू हो चुकी है. अब तक प्रदेश के 137 मदरसों ने प्राधिकरण के ऑनलाइन पोर्टल पर मान्यता के लिए आवेदन किया है. सरकार का लक्ष्य सभी पात्र संस्थानों को निर्धारित मानकों के अनुरूप लाकर उन्हें औपचारिक शिक्षा व्यवस्था का हिस्सा बनाना है.
नई व्यवस्था के तहत केवल वही मदरसे और अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थान केंद्र सरकार की विभिन्न शैक्षणिक योजनाओं का लाभ प्राप्त कर सकेंगे, जो निर्धारित नियमों और मानकों का पूरी तरह पालन करेंगे. इससे संस्थानों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, बेहतर प्रशासन और आधुनिक शिक्षण प्रणाली को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है. उत्तराखंड अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण का दायरा केवल मदरसों तक सीमित नहीं रहेगा. इसके अंतर्गत मुस्लिम, सिख, ईसाई, जैन, बौद्ध और पारसी समुदाय द्वारा संचालित अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थानों को भी शामिल किया गया है.