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India Daily

उत्तराखंड में इस बार कड़ाके की ठंड और भारी बर्फबारी की आशंका, आपदा प्रबंधन ने शुरू की तैयारी

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देश पर सभी जिलों को शीतलहर से बचाव के लिए पहले ही पर्याप्त धनराशि जारी कर दी गई है.

Gyanendra Sharma
Edited By: Gyanendra Sharma
Uttarakhand
Courtesy: Photo-Social Media

देहरादून: पहाड़ी राज्य उत्तराखंड में सर्दी का मौसम हमेशा चुनौतीपूर्ण रहता है, लेकिन इस बार मौसम विज्ञानियों और विशेषज्ञों ने सामान्य से अधिक कड़ाके की ठंड और भारी हिमपात का पूर्वानुमान जारी किया है. मानसून में हुई रिकॉर्ड तोड़ बारिश के बाद अब सर्दियों में भी प्रकृति अपना रौद्र रूप दिखा दिखा सकती है. इसे देखते हुए राज्य आपदा प्रबंधन विभाग ने अभी से कमर कस ली है और शीतलहर (कोल्ड वेव) से निपटने के लिए ठोस कदम उठाने शुरू कर दिए हैं.

बुधवार को सचिव आपदा प्रबंधन विनोद कुमार सुमन ने सभी जिलाधिकारियों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए महत्वपूर्ण बैठक की. बैठक में उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिए कि हर जिले को अपना “कोल्ड वेव एक्शन प्लान” तुरंत तैयार करके उत्तराखंड राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (USDMA) के साथ साझा करना होगा.

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देश पर सभी जिलों को शीतलहर से बचाव के लिए पहले ही पर्याप्त धनराशि जारी कर दी गई है. सचिव ने कहा, “अगर किसी जिले को और बजट की जरूरत पड़ती है तो वे तत्काल अपनी मांग शासन को भेजें, धनराशि में कोई कमी नहीं आने दी जाएगी.”

यात्रियों और स्थानीय लोगों की सुरक्षा सबसे बड़ी प्राथमिकता

शीतकालीन चारधाम यात्रा और केदारनाथ, हेमकुंड साहिब सहित अन्य ऊंचाई वाले तीर्थ स्थलों की यात्रा शुरू हो चुकी है. सचिव ने अधिकारियों को सख्त हिदायत दी कि ठंड और बर्फबारी के बीच किसी भी यात्री को परेशानी न हो.

ए़डवाइजरी जारी

उन्होंने कहा कि मौसम और सड़क की स्थिति का लगातार आकलन करें. भारी बर्फबारी या शीतलहर की चेतावनी मिलते ही यात्रियों को आगे न भेजा जाए. मार्ग बाधित होने पर सुरक्षित ठहराव स्थलों पर सभी व्यवस्थाएं (गर्म कपड़े, कंबल, गरम चाय-खाना, हीटर, मेडिकल किट) पहले से तैयार रखी जाएं. रैन बसेरों और नाइट शेल्टरों को पूरी तरह सक्रिय कर दिया जाए, विशेषकर बेघर और जरूरतमंद लोगों के लिए.

पिछले अनुभव से सीख

इस साल मानसून में उत्तराखंड ने भारी तबाही देखी थी. कई इलाकों में सामान्य से 50-60 फीसदी तक अधिक बारिश दर्ज की गई. विशेषज्ञों का मानना है कि इतनी अधिक नमी वाले बादल अब सर्दियों में भारी हिमपात का रूप ले सकते हैं. यही वजह है कि प्रशासन कोई जोखिम नहीं लेना चाहता और अभी से हर स्तर पर तैयारियां शुरू कर दी गई हैं. अगर मौसम विभाग की भविष्यवाणी सटीक साबित हुई तो इस बार औली, चोपता, मुनस्यारी, हर्षिल, चकराता जैसे ऊंचाई वाले क्षेत्रों में कई-कई फीट बर्फ जम सकती है, जिससे सड़कें लंबे समय तक बंद रहने की आशंका है.