सरकारी भूमि को अतिक्रमणकारियों से मुक्त कराने के लिए उत्तराखंड प्रशासन ने बड़ा कदम उठाया है. किच्छा हाईवे के किनारे बसे पहाड़गंज इलाके में वर्षों से चला आ रहा अवैध कब्जा अब समाप्त होने वाला है. एडीएम पंकज उपाध्याय के निर्देशन में हुए सर्वे के बाद प्रशासन ने 200 भवनों पर ध्वस्तीकरण के आदेश पारित कर दिए हैं. 1 जुलाई से बुलडोजर कार्रवाई शुरू होने वाली है. सरकार का साफ संदेश है कि सरकारी जमीन पर कोई भी अवैध कब्जा बर्दाश्त नहीं किया जाएगा.
प्रशासन ने पहाड़गंज क्षेत्र का पूरा सर्वेक्षण कर लिया है. पहले चरण में 350 भवन चिह्नित किए गए, जिनमें से 200 पर सुनवाई पूरी होने के बाद ध्वस्तीकरण के आदेश जारी कर दिए गए हैं. 199 भवन स्वामियों को नोटिस भी तामील करा दिए गए हैं. 1 जुलाई तक खुद खाली करने की अंतिम चेतावनी दी गई है.
एक व्यक्ति ने सरकारी भूमि पर सौ रुपये के स्टांप पेपर पर प्लाटिंग कर रामपुर, बहेड़ी समेत विभिन्न क्षेत्रों के लोगों को 10-20 लाख रुपये में प्लॉट बेच दिए थे. सरकार अब इस पूरे साजिश को उजागर कर सख्ती से निपट रही है. राजनीतिक संरक्षण में हुए इस अतिक्रमण को प्रशासन समाप्त करने जा रहा है.
जिन लोगों ने इन प्लॉटों पर मकान बनाए हैं, वे अब परेशान हैं. कई परिवारों ने बताया कि उन्होंने अच्छे विश्वास में जमीन खरीदी थी. प्रशासन का कहना है कि सरकारी जमीन पर किसी भी कीमत पर कब्जा नहीं चलेगा. असली दोषियों पर भी अलग से कार्रवाई की जाएगी.
सरकार ने पूरे मामले की पारदर्शी जांच के लिए कमेटी बनाई है. एसडीएम रुद्रपुर इस कमेटी के अध्यक्ष हैं. तहसीलदार, नगर निगम, ऊर्जा निगम और प्राधिकरण के अधिकारी सदस्य हैं. कमेटी दर्शन सिंह सहित सभी पहलुओं की जांच कर रिपोर्ट सौंपेगी.
पहाड़गंज में करीब चार एकड़ सरकारी नजूल भूमि अभी भी खाली है. प्रशासन ने इसे अतिक्रमण से बचाने के लिए तारबाड़ लगाने का फैसला किया है. एडीएम पंकज उपाध्याय ने कहा कि सरकारी संपत्ति की रक्षा करना हमारा दायित्व है और इसे पूरी मजबूती से निभाया जाएगा.
सरकार का स्पष्ट निर्देश है कि निर्धारित तिथि तक अतिक्रमण न हटने पर बुलडोजर कार्रवाई की जाएगी. प्रशासन पूरी तैयारी में जुट गया है. यह अभियान सिर्फ पहाड़गंज तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे जिले में सरकारी भूमि पर किसी भी अवैध कब्जे को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा.