उत्तराखंड में बिजली उपभोक्ताओं के लिए जुलाई की शुरुआत अतिरिक्त आर्थिक बोझ लेकर आ रही है. ऊर्जा निगम ने फ्यूल एंड पावर परचेज कॉस्ट एडजस्टमेंट के तहत नई दरें लागू करने का निर्णय लिया है. इसका असर घरेलू, व्यावसायिक, औद्योगिक, कृषि, बीपीएल और अस्थायी कनेक्शन सहित लगभग सभी श्रेणियों के उपभोक्ताओं पर दिखाई देगा. विभाग का कहना है कि बिजली खरीद की बढ़ी लागत के कारण यह सरचार्ज लगाया जा रहा है.
ऊर्जा निगम के अनुसार जुलाई महीने के बिजली बिल में फ्यूल पावर परचेज कॉस्ट एडजस्टमेंट जोड़ा जाएगा. इसके तहत अलग-अलग श्रेणियों के उपभोक्ताओं से 5 पैसे से लेकर 20 पैसे प्रति यूनिट तक अतिरिक्त राशि वसूली जाएगी. यह फैसला बिजली खरीद की बढ़ी लागत को संतुलित करने के उद्देश्य से लिया गया है.
इस बार केवल सामान्य उपभोक्ता ही नहीं, बल्कि बीपीएल श्रेणी के उपभोक्ताओं पर भी अतिरिक्त शुल्क लगाया जाएगा. घरेलू, व्यावसायिक, सरकारी संस्थान, कृषि, उद्योग, रेलवे, ईवी चार्जिंग और अन्य सभी श्रेणियां इस नई व्यवस्था के दायरे में रहेंगी. अस्थायी बिजली कनेक्शन पर सबसे अधिक 20 पैसे प्रति यूनिट का सरचार्ज निर्धारित किया गया है.
ऊर्जा विभाग का कहना है कि बाजार से महंगी दरों पर अतिरिक्त बिजली खरीदने और थर्मल पावर उत्पादन में कोयले की लागत बढ़ने का सीधा प्रभाव बिजली खरीद खर्च पर पड़ा है. इसी कारण फ्यूल कॉस्ट एडजस्टमेंट के माध्यम से यह अतिरिक्त भार उपभोक्ताओं तक पहुंचाया जा रहा है. जब बिजली खरीद सस्ती होती है तो उपभोक्ताओं को राहत भी दी जाती है.
इसी बीच जल निगम ने ऑटोमेटिक वाटर मीटर सही ढंग से काम नहीं करने पर चार कंपनियों को नोटिस जारी किए हैं. इन मीटरों से पानी की खपत का डिजिटल डाटा समय पर उपलब्ध नहीं हो पा रहा है. विभाग ने कंपनियों से तकनीकी खामियां दूर करने और सिस्टम को जल्द दुरुस्त करने के निर्देश दिए हैं.
जुलाई से लागू होने वाला यह सरचार्ज लाखों उपभोक्ताओं के मासिक बिजली खर्च को बढ़ाएगा. ऊर्जा निगम का कहना है कि यह व्यवस्था नियामकीय प्रावधानों के तहत लागू की जा रही है. वहीं उपभोक्ताओं को उम्मीद है कि भविष्य में बिजली खरीद लागत कम होने पर उन्हें फिर से राहत मिल सकेगी.