चंडीगढ़: सुखना झील की सुंदरता और जल क्षमता बचाने के लिए शुरू किया गया गाद हटाने (डी-सिल्टिंग) का काम तेजी से आगे बढ़ रहा है: रेगुलेटरी एंड पर 34 हजार घनमीटर गाद हटाने का लक्ष्य पूरा कर लिया गया है. इससे झील में ज्यादा पानी जमा हो सकेगा और पर्यटकों को भी बेहतर सुविधाएं मिलेंगी.
यूटी इंजीनियरिंग विभाग के मुख्य अभियंता सीबी ओझा ने बताया कि पूरे प्रोजेक्ट का करीब 80 प्रतिशत काम अब तक पूरा हो चुका है. आईआईटी रुड़की, विश्व वन्यजीव कोष (WWF) और वन विभाग की सलाह पर करीब एक महीने पहले यह काम शुरू किया गया था. हालांकि मानसून आने तक यह काम जारी रहेगा.
रेगुलेटरी एंड पर 351 मीटर स्तर तक खुदाई की जा रही है. निकाली गई मिट्टी को वैज्ञानिक तरीके से झील के किनारों (तटबंध) और पैदल रास्तों को मजबूत और ऊंचा बनाने में इस्तेमाल किया जा रहा है. काम को समय पर पूरा करने के लिए चार चेन-माउंटेड एक्सकेवेटर, जेसीबी मशीनें और कई टिप्पर लगाए गए हैं.
सुखना झील में आखिरी बार गाद हटाने का काम चार साल से ज्यादा समय पहले हुआ था. गर्मियों में सबसे पहले रेगुलेटरी एंड का हिस्सा सूख जाता है, इसलिए यहां गाद हटाना आसान हो जाता है. गाद जमा होने से झील की पानी भरने की क्षमता लगातार कम हो रही थी. इसी समस्या को दूर करने के लिए यूटी प्रशासन ने पिछले साल WWF की मदद से पांच साल की एकीकृत प्रबंधन योजना बनाई थी.
सुखना झील करीब 565 एकड़ में फैली हुई है. इसका कैचमेंट एरिया लगभग 10,395 एकड़ है. वर्ष 1988 में केंद्र सरकार ने इसे राष्ट्रीय वेटलैंड घोषित किया था. झील के आसपास सुखना वन्यजीव अभयारण्य भी है. नई योजना में कई महत्वपूर्ण काम शामिल हैं. इनमें झील का जल स्तर बनाए रखना, जलीय जीवों का संरक्षण, झील की सफाई, पर्यटकों के लिए बेहतर सुविधाएं बढ़ाना और सौर ऊर्जा से चलने वाली नौकाओं की संख्या बढ़ाना शामिल है.