उत्तराखंड अपनी धार्मिक विरासत और प्राकृतिक सौंदर्य के लिए देशभर में विशेष पहचान रखता है. यहां स्थित प्राचीन मंदिर और आध्यात्मिक स्थल हर वर्ष लाखों श्रद्धालुओं को आकर्षित करते हैं. इसी क्रम में प्रदेश के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने रामनगर स्थित श्री हनुमान धाम की महत्ता को लेकर संदेश साझा किया. उन्होंने कहा कि यह मंदिर केवल आस्था का केंद्र नहीं, बल्कि श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक ऊर्जा का अद्भुत संगम भी है.
मुख्यमंत्री ने अपने संदेश में कहा कि नैनीताल जिले के रामनगर में स्थित श्री हनुमान धाम प्रदेश के प्रमुख धार्मिक स्थलों में शामिल है. यहां का शांत वातावरण और दिव्य आभा श्रद्धालुओं को विशेष आध्यात्मिक अनुभूति प्रदान करती है. यही कारण है कि यह मंदिर साल भर भक्तों की आस्था का केंद्र बना रहता है.
रामनगर, नैनीताल में स्थित श्री हनुमान धाम आस्था, भक्ति और आध्यात्मिक ऊर्जा का अनुपम केंद्र है। यहाँ श्रद्धालुओं को श्री हनुमान के नौ दिव्य स्वरूपों एवं उनकी बारह पावन लीलाओं के दर्शन का अद्भुत सौभाग्य प्राप्त होता है।
— Pushkar Singh Dhami (@pushkardhami) June 30, 2026
आप भी नैनीताल जनपद आगमन पर इस पावर मंदिर के दर्शन अवश्य करें। pic.twitter.com/OgOV1Iyc6X
श्री हनुमान धाम की सबसे बड़ी विशेषता यहां स्थापित भगवान हनुमान के नौ दिव्य स्वरूप हैं. इसके साथ ही श्रद्धालुओं को उनकी बारह पावन लीलाओं के दर्शन का भी अवसर मिलता है. यह अनूठी प्रस्तुति मंदिर को अन्य धार्मिक स्थलों से अलग पहचान दिलाती है.
मुख्यमंत्री धामी ने नैनीताल आने वाले पर्यटकों और श्रद्धालुओं से आग्रह किया कि वे अपनी यात्रा के दौरान श्री हनुमान धाम के दर्शन अवश्य करें. उनका कहना है कि इस पवित्र स्थल की आध्यात्मिक ऊर्जा और शांत वातावरण हर आगंतुक को विशेष अनुभव प्रदान करता है.
उत्तराखंड सरकार धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए लगातार प्रयास कर रही है. चारधाम यात्रा के साथ प्रदेश के अन्य प्रमुख मंदिरों को भी पर्यटन मानचित्र पर मजबूत पहचान दिलाई जा रही है. श्री हनुमान धाम भी ऐसे महत्वपूर्ण स्थलों में शामिल है, जहां हर वर्ष बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं.
श्री हनुमान धाम केवल पूजा का स्थान नहीं, बल्कि प्रदेश की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत का महत्वपूर्ण प्रतीक भी है. मुख्यमंत्री ने विश्वास जताया कि ऐसे पवित्र स्थलों का संरक्षण और प्रचार उत्तराखंड की धार्मिक पहचान को और मजबूत करेगा. साथ ही आने वाली पीढ़ियों को अपनी सांस्कृतिक परंपराओं से जोड़ने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा.