उत्तराखंड की राजनीति में 4 जुलाई की तारीख खास मानी जा रही है. मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी लगातार पांच साल तक पद पर बने रहने का पड़ाव पूरा करने जा रहे हैं. इसे लेकर राज्य सरकार और भाजपा संगठन विशेष कार्यक्रमों की तैयारी कर रहे हैं. भाजपा इसे एक ऐतिहासिक उपलब्धि के रूप में देख रही है, क्योंकि राज्य गठन के बाद एनडी तिवारी के बाद धामी ऐसे मुख्यमंत्री हैं, जिन्होंने लगातार पांच साल तक सरकार का नेतृत्व किया है. वहीं कांग्रेस ने इस जश्न पर तंज कसते हुए अलग राय रखी है.
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने 4 जुलाई 2021 को उत्तराखंड की कमान संभाली थी. तब से वह लगातार मुख्यमंत्री के रूप में काम कर रहे हैं. अब उनके कार्यकाल के पांच वर्ष पूरे होने पर भाजपा पूरे प्रदेश में कार्यक्रम आयोजित करने की तैयारी कर रही है. पार्टी का मानना है कि यह राज्य की राजनीतिक स्थिरता का प्रतीक है. प्रदेश भाजपा मुख्यालय जल्द ही एक सप्ताह तक चलने वाले कार्यक्रमों की रूपरेखा जारी कर सकता है, जिसमें सरकार की उपलब्धियों को जनता तक पहुंचाने पर भी जोर रहेगा.
उत्तराखंड बनने के बाद वर्ष 2002 में पहली निर्वाचित सरकार के मुख्यमंत्री बने एनडी तिवारी ने 2 मार्च 2002 से 7 मार्च 2007 तक लगातार 1831 दिनों तक पद संभाला था. यह अब तक राज्य में किसी भी मुख्यमंत्री का सबसे लंबा कार्यकाल माना जाता है. मुख्यमंत्री धामी 29 जून 2026 तक 1821 दिन पूरे कर चुके हैं और अगले कुछ दिनों में इस रिकॉर्ड को पार करने की स्थिति में पहुंच जाएंगे. इसी वजह से भाजपा इस उपलब्धि को ऐतिहासिक मान रही है.
भाजपा नेताओं का कहना है कि लगातार पांच साल तक सरकार चलाना जनता के विश्वास और स्थिर नेतृत्व का प्रमाण है. पार्टी इस मौके को उत्सव के रूप में मनाने की तैयारी में है. दूसरी ओर कांग्रेस ने इस पर सवाल उठाए हैं. प्रदेश कांग्रेस उपाध्यक्ष सूर्यकांत धस्माना ने कहा कि केवल पांच साल पूरे होने पर जश्न मनाने के बजाय सरकार को अपने कामकाज का हिसाब देना चाहिए. उनका कहना है कि लंबे कार्यकाल से ज्यादा महत्वपूर्ण जनता के लिए किए गए कार्य हैं.
मुख्यमंत्री धामी के कार्यकाल के पांच वर्ष पूरे होने और एनडी तिवारी के रिकॉर्ड के करीब पहुंचने से उत्तराखंड की राजनीति में नई चर्चा शुरू हो गई है. एक ओर भाजपा इसे अपनी उपलब्धि के रूप में पेश कर रही है, वहीं विपक्ष इसे राजनीतिक प्रचार बता रहा है. आने वाले दिनों में प्रस्तावित कार्यक्रमों और विपक्ष की प्रतिक्रिया के बीच यह मुद्दा राज्य की राजनीति में प्रमुख चर्चा का विषय बना रह सकता है.