प्रतियोगी परीक्षाओं के प्रश्नपत्र लीक होने की लगातार सामने आ रही घटनाओं ने युवाओं और अभिभावकों में गहरा असंतोष पैदा कर दिया है. दिल्ली सहित देश के कई हिस्सों में चल रहे विरोध प्रदर्शनों के बीच राष्ट्रव्यापी आंदोलन के आह्वान का असर अब उत्तराखंड के हल्द्वानी में भी दिखाई दे रहा है. शहर के बुद्ध पार्क में विभिन्न छात्र और सामाजिक संगठनों के कार्यकर्ता एकत्र होकर शिक्षा व्यवस्था में सुधार की मांग को लेकर प्रदर्शन कर रहे हैं.
प्रदर्शन में उत्तराखंड क्रांति दल, आइसा, परिवर्तन कामी छात्र संगठन समेत कई अन्य संगठनों के प्रतिनिधि शामिल हैं. सभी संगठनों ने युवाओं के भविष्य से जुड़े इस मुद्दे पर एकजुट होकर आवाज बुलंद करने का फैसला किया है.
प्रदेश के सबसे बड़े महाविद्यालय एमबीपीजी कॉलेज में भी इस मुद्दे को लेकर छात्रों में खासा आक्रोश देखा जा रहा है. एनएसयूआई के नेतृत्व में छात्र-छात्राएं कॉलेज परिसर से बुद्ध पार्क तक रैली निकालेंगे और वहां अन्य संगठनों के साथ मिलकर प्रदर्शन में शामिल होंगे. एनएसयूआई के जिलाध्यक्ष विवेक मिश्रा ने कहा कि नीट यूजी पेपर लीक मामले ने देशभर के छात्रों का भरोसा कमजोर किया है. उन्होंने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग दोहराते हुए कहा कि शिक्षा व्यवस्था में जवाबदेही तय होना जरूरी है.
प्रदर्शनकारियों का कहना है कि केवल राष्ट्रीय स्तर की परीक्षाएं ही नहीं, बल्कि उत्तराखंड तकनीकी विश्वविद्यालय से जुडे पेपर लीक के मामले भी गंभीर चिंता का विषय हैं. उनका आरोप है कि इन घटनाओं ने राज्य में परीक्षा प्रणाली की पारदर्शिता पर सवाल खड़े कर दिए हैं. छात्र संगठनों का कहना है कि पहले प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक की घटनाएं सामने आती थीं, लेकिन अब विश्वविद्यालय स्तर की परीक्षाओं पर भी सवाल उठ रहे हैं. ऐसे में जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय करने और संबंधित मंत्री के इस्तीफे की मांग भी तेज हो गई है.
आयोजकों के अनुसार दोपहर 12:30 बजे बुद्ध पार्क से सभी संगठन संयुक्त रूप से जिलाधिकारी कैंप कार्यालय तक रैली निकालेंगे. वहां जिलाधिकारी ललित मोहन रयाल के माध्यम से राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री के नाम ज्ञापन भेजा जाएगा. प्रदर्शनकारी निष्पक्ष जांच, दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई, परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता और भविष्य में पेपर लीक जैसी घटनाओं को रोकने के लिए प्रभावी व्यवस्था लागू करने की मांग कर रहे हैं. उनका कहना है कि छात्रों के भविष्य के साथ किसी भी प्रकार का समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा.