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आस्था का महासागर: सोमवती अमावस्या पर हरिद्वार में 76.5 लाख श्रद्धालुओं ने लगाई गंगा में डुबकी

सोमवती अमावस्या के अवसर पर हरिद्वार में श्रद्धालुओं का अभूतपूर्व जनसैलाब उमड़ा. हरकी पैड़ी समेत विभिन्न घाटों पर करीब 76.5 लाख लोगों ने गंगा स्नान किया. इस आयोजन ने कुंभ-2027 की तैयारियों को परखने का भी बड़ा अवसर दिया.

Sagar
Edited By: Sagar Bhardwaj
आस्था का महासागर: सोमवती अमावस्या पर हरिद्वार में 76.5 लाख श्रद्धालुओं ने लगाई गंगा में डुबकी
Courtesy: X

अधिकमास में पड़ने वाली सोमवती अमावस्या ने इस बार हरिद्वार को आस्था के सबसे बड़े केंद्रों में बदल दिया. सुबह से लेकर देर शाम तक लाखों श्रद्धालु मां गंगा के दर्शन और स्नान के लिए धर्मनगरी पहुंचते रहे. हरकी पैड़ी, ब्रह्मकुंड और अन्य प्रमुख घाट श्रद्धालुओं से खचाखच भरे दिखाई दिए. प्रशासन और पुलिस ने भीड़ को संभालने के लिए व्यापक इंतजाम किए. यह विशाल आयोजन न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण रहा, बल्कि आगामी कुंभ-2027 की तैयारियों की एक बड़ी परीक्षा भी साबित हुआ.

घाटों पर उमड़ी अटूट श्रद्धा

सोमवती अमावस्या के दिन हरिद्वार के घाटों पर श्रद्धा का अद्भुत दृश्य देखने को मिला. सुबह होते ही हरकी पैड़ी और आसपास के घाटों पर स्नान के लिए लंबी कतारें लग गईं. उत्तर प्रदेश, दिल्ली, हरियाणा, पंजाब, राजस्थान और मध्य प्रदेश समेत कई राज्यों से श्रद्धालु यहां पहुंचे. पूरे दिन गंगा स्नान, पितृ तर्पण और दान-पुण्य का सिलसिला चलता रहा. श्रद्धालुओं के चेहरों पर धार्मिक उत्साह साफ दिखाई दे रहा था. शाम की गंगा आरती तक करीब 76 लाख 50 हजार लोग गंगा में स्नान कर चुके थे, जबकि लोगों का आना देर रात तक जारी रहा.

कंट्रोल रूम से रखी गई हर गतिविधि पर नजर

इतनी बड़ी भीड़ के बीच प्रशासन ने तकनीक का भरपूर इस्तेमाल किया. केंद्रीय नियंत्रण कक्ष से पूरे मेला क्षेत्र की लगातार निगरानी की गई. मेलाधिकारी सोनिका ने स्वयं कंट्रोल रूम पहुंचकर व्यवस्थाओं का जायजा लिया. सीसीटीवी कैमरों के माध्यम से हरकी पैड़ी और आसपास के इलाकों में भीड़ की स्थिति पर नजर रखी गई. अधिकारियों ने यातायात, श्रद्धालुओं की आवाजाही और सुरक्षा व्यवस्था की पल-पल जानकारी ली. किसी भी संभावित समस्या से निपटने के लिए सभी विभागों को सतर्क रखा गया था.

सुरक्षा व्यवस्था बनी सबसे बड़ी ताकत

श्रद्धालुओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए मेला क्षेत्र को 6 सुपर जोन, 16 जोन और 46 सेक्टरों में विभाजित किया गया था. संवेदनशील स्थानों पर अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया. विशेष ट्रैफिक प्लान के जरिए वाहनों की आवाजाही को नियंत्रित किया गया ताकि श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की परेशानी न हो. कंट्रोल रूम और सीसीटीवी नेटवर्क की मदद से भीड़ प्रबंधन को प्रभावी बनाया गया. अधिकारियों का कहना है कि इतने बड़े आयोजन को शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न कराना प्रशासन के लिए बड़ी उपलब्धि रही.

कुंभ-2027 की तैयारियों का बड़ा अभ्यास

इस विशाल स्नान पर्व को आगामी कुंभ-2027 के लिए एक वास्तविक परीक्षण माना जा रहा है. प्रशासन अब इस आयोजन से मिले आंकड़ों का विश्लेषण करेगा. यह समझने की कोशिश की जाएगी कि किस स्थान पर सबसे अधिक भीड़ रही, किस समय दबाव बढ़ा और आपात स्थिति में प्रतिक्रिया की गति कैसी रही. अधिकारियों के अनुसार भविष्य के कुंभ मेले में रियल टाइम क्राउड एनालिटिक्स, आधुनिक सीसीटीवी नेटवर्क और इंटीग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर जैसी तकनीकों का उपयोग और व्यापक स्तर पर किया जाएगा. ज्योतिषाचार्यों के अनुसार अधिकमास में पड़ने वाली सोमवती अमावस्या का विशेष धार्मिक महत्व है और इस दिन गंगा स्नान को अत्यंत पुण्यदायी माना जाता है.