उत्तराखंड के उत्तरकाशी जिले स्थित हर्षिल और धराली क्षेत्र में भागीरथी नदी का लगातार बढ़ता जलस्तर प्रशासन और स्थानीय लोगों के लिए चिंता का विषय बन गया है. पिछले तीन दिनों से नदी में जलस्तर बढ़ने के कारण यहां आपदा जैसे हालात बनने लगे हैं. हर्षिल और धराली के बीच बनी झील का विस्तार बढ़ने से आसपास के क्षेत्रों में रहने वाले करीब दो हजार लोगों की सुरक्षा को लेकर आशंकाएं गहरा गई हैं.
स्थानीय लोगों का कहना है कि अभी केवल ग्लेशियरों के पिघलने से नदी में पानी बढ़ रहा है. यदि मानसून पूरी तरह सक्रिय होने के बाद भारी वर्षा हुई, तो भागीरथी और उसकी सहायक नदियों में जलस्तर और तेजी से बढ़ सकता है.
गढ़वाल मंडल विकास निगम (जीएमवीएन) के गेस्ट हाउस के आसपास भी बढ़ते जलस्तर का असर दिखाई देने लगा है. पिछले साल सुरक्षा के लिए बनाए गए पुश्ते में अब दरारें उभर आई हैं और लगातार कटाव हो रहा है. नदी का बहाव अब गेस्ट हाउस के पिछले हिस्से तक पहुंच चुका है, जिससे संरचना की सुरक्षा पर सवाल खड़े हो गए हैं.
वहीं, नदी के तेज बहाव के कारण बड़े-बड़े देवदार के पेड़ बहकर आ रहे हैं, जिससे निकट स्थित आर्मी कैंप के आसपास भी कटाव का खतरा बढ़ गया है. प्रशासन हालात पर लगातार नजर बनाए हुए है. स्थिति की गंभीरता को देखते हुए सिंचाई विभाग ने मौके पर राहत एवं सुरक्षा कार्य तेज कर दिए हैं. विभाग के सहायक अभियंता दरबान सिंह सरियाल अपनी टीम के साथ सोमवार को प्रभावित क्षेत्र पहुंचे और हालात का जायजा लिया.
नदी के बहाव को नियंत्रित करने के लिए एक्सावेटर मशीनों की मदद से चैनलाइजेशन का कार्य तेज किया गया है. अधिकारियों का कहना है कि जलधारा को सुरक्षित दिशा में मोड़ने का प्रयास किया जा रहा है, ताकि कटाव को कम किया जा सके और आसपास की आबादी सुरक्षित रहे. हर्षिल और धराली क्षेत्र के लोग अभी तक पिछले वर्ष आई भीषण आपदा को नहीं भूले हैं. खीरगंगा नदी में आई विनाशकारी बाढ़ के कारण धराली कस्बा भारी मलबे की चपेट में आ गया था. उस आपदा में सात लोगों की मौत की पुष्टि हुई थी, जबकि 68 लोग लापता हो गए थे. इसी दौरान तेलगाड़ नदी के उफान पर आने से हर्षिल कैंप में नौ जवान भी लापता हुए थे, जिनमें से दो के शव बाद में बरामद किए गए.