उत्तर प्रदेश सरकार ने एसिड अटैक पीड़िताओं के पुनर्वास और उन्हें सम्मानजनक जीवन उपलब्ध कराने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है. सोमवार को कैबिनेट बाई सर्कुलेशन के माध्यम से 'एसिड अटैक सर्वाइवर की समग्र सहायता एवं पुनर्वास नीति-2026' को मंजूरी दे दी गई. इस नीति का उद्देश्य केवल आर्थिक सहायता तक सीमित नहीं है, बल्कि पीड़िताओं को सामाजिक, आर्थिक और मानसिक रूप से सशक्त बनाकर उन्हें आत्मनिर्भर बनाना भी है.
सरकार का मानना है कि एसिड अटैक केवल एक आपराधिक घटना नहीं, बल्कि मानवता के विरुद्ध किया जाने वाला बेहद जघन्य अपराध है, जिसका प्रभाव पीड़ित के पूरे जीवन पर पड़ता है. ऐसे मामलों में पीड़िताओं को गंभीर शारीरिक चोटों के साथ मानसिक आघात, सामाजिक उपेक्षा और आर्थिक असुरक्षा जैसी कई चुनौतियों का सामना करना पड़ता है.
नई नीति के तहत एसिड अटैक पीड़िताओं को पहले की तुलना में अधिक आर्थिक सहायता और मुआवजा दिया जाएगा. साथ ही उनके उपचार, प्लास्टिक सर्जरी, पुनर्वास और दीर्घकालिक देखभाल के लिए समग्र व्यवस्था विकसित की जाएगी. नीति में गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा सुविधाओं के साथ शिक्षा, कौशल विकास, रोजगार, स्वरोजगार, मनोवैज्ञानिक परामर्श और कानूनी सहायता जैसी सेवाओं को भी शामिल किया गया है. सरकार का प्रयास है कि पीड़िताओं को एक ही व्यवस्था के अंतर्गत सभी आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं.
सरकार ने इस नीति को प्रभावी बनाने के लिए सर्वाइवर-केंद्रित दृष्टिकोण अपनाया है. विभिन्न सरकारी विभागों, संस्थानों और संबंधित एजेंसियों के समन्वय से कन्वर्जेंस मॉडल के आधार पर इसका संचालन किया जाएगा. इस व्यवस्था के जरिए यह सुनिश्चित किया जाएगा कि पीड़िताओं को चिकित्सा, पुनर्वास, शिक्षा, रोजगार और सामाजिक पुनर्स्थापन से जुड़ी सभी सेवाएं समयबद्ध और व्यवस्थित रूप से मिल सकें.
सरकार का कहना है कि नई नीति का उद्देश्य केवल वित्तीय सहायता प्रदान करना नहीं, बल्कि एसिड अटैक पीड़िताओं को समाज की मुख्यधारा से जोड़ना है. शिक्षा और कौशल प्रशिक्षण के माध्यम से उन्हें रोजगार और स्वरोजगार के अवसर उपलब्ध कराए जाएंगे, ताकि वे आत्मनिर्भर बन सकें और सम्मानपूर्वक जीवन जी सकें. विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की समग्र पुनर्वास नीति पीड़िताओं के सामाजिक पुनर्स्थापन में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है और उन्हें नई शुरुआत का अवसर प्रदान करेगी.