मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन की अध्यक्षता में आयोजित बैठक में दलहन उत्पादन में आत्मनिर्भरता की समीक्षा की गई. मुख्य सचिव ने प्रदेश में उत्पादित दलहन की न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर नेफेड और एनसीडीसी के जरिए खरीद का प्रस्ताव केंद्र सरकार को भेजने के निर्देश दिए. इसके अलावा, किसान उत्पादक संगठनों (FPO) को बढ़ावा देने के लिए एक विशेष सेल का गठन किया जाएगा.
बैठक में दलहन की उत्पादकता को बढ़ाकर 12 कुंतल प्रति हेक्टेयर तक ले जाने और गुणवत्ता में सुधार पर जोर दिया गया. इसके लिए उन्नत किस्म के बीज, बेहतर कृषि तकनीक, फसल प्रदर्शन और किसानों को तकनीकी मार्गदर्शन प्रदान किया जाएगा. मुख्य सचिव ने कहा कि दलहन उत्पादन बढ़ने से प्रोटीन की उपलब्धता बढ़ेगी, जिससे लोगों के स्वास्थ्य में सुधार होगा.
कृषि विभाग के अधिकारियों ने बताया कि भारत सरकार की यह परियोजना वर्ष 2025-26 से 2030-31 तक संचालित होगी, जिसकी कार्ययोजना केंद्र को भेजी जा चुकी है. इस योजना के तहत मुख्य रूप से उड़द, अरहर और मसूर का चयन किया गया है. परियोजना के अंतर्गत बीज उत्पादन और फसल प्रदर्शन आधारित कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे.
किसानों की आय बढ़ाने के लिए स्थानीय स्तर पर दलहन प्रसंस्करण (प्रोसेसिंग) इकाइयां स्थापित करने पर काम किया जाएगा. इससे फसलों के मूल्य संवर्धन (value addition) में मदद मिलेगी और किसानों को उनके उत्पाद का बेहतर दाम मिल सकेगा. अधिकारियों को केंद्र की इस परियोजना के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए सभी प्रयास करने के निर्देश दिए गए हैं.