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उत्तराखंड में खनन से बना कमाई का नया रिकॉर्ड, सरकार की झोली में आए करीब 10 करोड़ रुपये

उत्तराखंड के रामनगर क्षेत्र में कोसी और दाबका नदी से हुए खनन कार्य ने इस साल राजस्व का नया रिकॉर्ड बनाया है. सरकार को करीब 10 करोड़ रुपये की आय हुई है, जो पिछले वर्ष की तुलना में 46 प्रतिशत अधिक है.

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Edited By: Babli Rautela
उत्तराखंड में खनन से बना कमाई का नया रिकॉर्ड, सरकार की झोली में आए करीब 10 करोड़ रुपये
Courtesy: Social Media

उत्तराखंड में इस वित्तीय वर्ष खनन कार्य से सरकार को बड़ी सफलता मिली है. रामनगर क्षेत्र की कोसी और दाबका नदी से हुए उपखनिज निकासी कार्य ने राजस्व के नए रिकॉर्ड स्थापित कर दिए हैं. इस बार सरकार को लगभग 9 करोड़ 79 लाख रुपये की आय हुई है, जो पिछले वर्ष की तुलना में काफी अधिक है. खनन कार्य मानसून सीजन शुरू होने के साथ फिलहाल बंद कर दिया गया है, लेकिन इसके पहले हुए काम ने सरकार की आय में बड़ा योगदान दिया है.

पिछले साल से 46 प्रतिशत अधिक हुई कमाई

तराई पश्चिमी वन प्रभाग की ओर से जारी आंकड़ों के अनुसार वित्तीय वर्ष 2024 से 25 में कोसी और दाबका नदी से कुल 4 करोड़ 54 लाख रुपये का राजस्व प्राप्त हुआ था. वहीं इस वर्ष यह आंकड़ा बढ़कर 9 करोड़ 79 लाख 19 हजार 791 रुपये तक पहुंच गया. यानी एक साल में राजस्व में करीब 46 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई है. यह बढ़ोतरी प्रदेश के खनन क्षेत्र के लिए बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है.

रामनगर क्षेत्र में कोसी नदी के कालूसिद्ध, बंजारी प्रथम, बंजारी द्वितीय, खड़ंजा और कठियापुल गेट के अलावा दाबका नदी के छोई गेट से खनन कार्य किया जाता है. इस वर्ष खनन कार्य अक्टूबर माह से शुरू हुआ था और सामान्य रूप से 31 मई तक चलने के बजाय 19 जून तक जारी रहा. लंबे समय तक संचालन होने से भी राजस्व में बढ़ोतरी का फायदा मिला.

10 लाख घनमीटर से अधिक उपखनिज की निकासी

आंकड़ों के अनुसार इस वर्ष कुल 10 लाख 87 हजार 997 घनमीटर उपखनिज निकाला गया. इसमें कोसी नदी से 9 लाख 59 हजार 626 घनमीटर और दाबका नदी से 1 लाख 28 हजार 371 घनमीटर उपखनिज की निकासी की गई. खनन गतिविधियों के सुचारु संचालन और निगरानी के कारण उत्पादन में भी उल्लेखनीय वृद्धि देखने को मिली.

तराई पश्चिमी वन प्रभाग के अधिकारियों का कहना है कि इस बार राजस्व बढ़ने के पीछे सबसे बड़ा कारण अवैध खनन और अवैध परिवहन के खिलाफ चलाया गया सख्त अभियान रहा. विभाग की टीमों ने लगातार आकस्मिक निरीक्षण, रात में औचक गश्त, निकासी गेटों पर अभिलेखों का सत्यापन और नियमित निगरानी की. इसके कारण राजस्व हानि को काफी हद तक रोका जा सका.