नई दिल्ली: भारतीय वायुसेना के वीर चक्र से सम्मानित ग्रुप कैप्टन अभिनंदन वर्धमान का नाम एक बार फिर से चर्चा में है. हालांकि, इसकी वजह कोई जंग नहीं बल्कि उनके करियर का एक अहम मोड़ है. बता दें कि अभिनंदन ने भारतीय वायुसेना से विदाई लेकर कमर्शियल एविएशन की दुनिया में कदम रखा है. रिपोर्ट्स के मुताबिक, अभिनंदन ने 31 मार्च 2026 को भारतीय वायुसेना से रिटायरमेंट लिया था.
इसके बाद वो अगस्त 2026 में गोवा स्थित क्षेत्रीय एयरलाइन FLY91 से बतौर पायलट जुड़े थे. रिपोर्ट के अनुसार, वह कमर्शियल ऑपरेशन के लिए जरूरी ट्रेनिंग और प्रक्रिया पूरी कर रहे हैं. लेकिन यहां एक बड़ा सवाल उठता है जो पायलट MiG-21 जैसे फाइटर जेट उड़ा चुका हो, क्या वह सीधे पैसेंजर फ्लाइट उड़ा सकता है? इसका जवाब है हां, लेकिन इसके लिए कई नियम और प्रक्रियाएं पूरी करनी होती हैं.
इसका जवाब है हां, लेकिन डायरेक्ट नहीं. बता दें कि भारत में डिफेंस फोर्स के योग्य पायलटों के लिए सिविल एविशन में आने का अलग प्रावधान है. DGCA यानी डायरेक्टोरेट जनरल ऑफ सिविल एविएशन ने डिफेंस पायलटों के लिए कमर्शियल पायलट लाइसेंस और एयरलाइन ट्रांसपोर्ट पायल लाइसेंसर हासिल करने की प्रक्रिया तय की हुई है.
DGCA के नियमों के अनुसार, भारतीय वायुसेना, नौसेना, थलसेना या कोस्ट गार्ड के योग्य पायलट अपने एक्सपीरियंस कऔर योग्यता के आधार पर कुछ फ्लाइंह टेस्ट या अन्य आवश्यकताओं में छूट के पात्र हो सकते हैं. लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि सभी नियम खत्म हो जाते हैं. चलिए जानते हैं क्या हैं इसके नियम-
कोई भी सैन्य अधिकारी सेवा में रहते हुए अपनी इच्छा से किसी प्राइवेट एयरलाइन में जाकर पायलट की नौकरी शुरू नहीं कर सकता. पहले उसे सैन्य सेवा से उचित तरीके से रिहा या रिटायर होना पड़ता है. इसके बाद संबंधित डिफेंस अथॉरिटी और डॉक्यूमेंटेशन पूरा करना होता है. रिपोर्ट्स के अनुसार अभिनंदन ने वायुसेना से रिटायर होने के बाद रक्षा मंत्रालय से NOC यानी नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट हासिल किया. इसके बाद सिविल एविशन क्षेत्र में कदम रखा.
वायुसेना में पायलट को जो ट्रेनिंग और फ्लाइंग एक्सपीरियंस मिलता है, वह बेहद हाई लेवल का होता है. हालांकि, सैन्य विमान उड़ाने की योग्यता अपने आप में एयरलाइन की पैसेंजर फ्लाइट उड़ाने का सिविल लाइसेंस नहीं बन जाती हैं. इसके लिए DGCA के निर्धारित नियमों के तहत डॉक्यूमेंट जमा करने और आवश्यक लाइसेंस प्रक्रिया पूरी करनी होती है.
डिफेंस पायलट के एक्सपीरियंस को ध्यान में रखते हुए नियमों में कुछ छूट का प्रावधान है. उदाहरण के लिए, DGCA के नियमों में डिफेंस पायलट के लिए पहले से हासिल फ्लाइंग एक्सपीरियंस को मान्यता देने का प्रावधान है.
सैन्य पायलट होने के बावजूद नागरिक विमानन से जुड़े नियमों की जानकारी साबित करना जरूरी है. DGCA के मौजूदा नियमों के मुताबिक डिफेंस पायलटों को एयर रेग्यूलेशन्स, एयर नेविगेशन और एविशन मीटियोरलॉजी जैसे विषयों से संबंधित परीक्षाएं पास करनी पड़ सकती हैं. विमान के प्रकार के आधार पर टेक्निकल स्पेसिफिक और परफॉर्मेंस से जुड़ी परीक्षा भी आवश्यक हो सकती है.
MiG-21 उड़ाना आता है, इसका मतलब यह नहीं होता है कि ATR या Airbus उड़ाना आता है. जिस विमान को पायलट एयरलाइन में उड़ाएगा, उसके सिस्टम और संचालन के लिए टाइप-स्पेसिफिक ट्रेनिंग और आवश्यक स्किल असेसमेंट किए जाते हैं. DGCA के नियमों में फ्लाइट टाइप के अनुसार, टेक्निकल ट्रेनिंग और सिमूलेटर/एयरक्राफ्ट कॉमपेटेंसी का प्रावधान है. यही वजह है कि अभिनंदन जैसे अनुभवी फाइटर पायलट को भी कमर्शियल एयरलाइन में शामिल होने के बाद निर्धारित ट्रेनिंग से गुजरना पड़ रहा है.
कमर्शियल पायलट के लिए केवल उड़ान अनुभव ही काफी नहीं है. स्वास्थ्य और मेडिकल फिटनेस भी महत्वपूर्ण है. DGCA की सिविल एविएशन सिस्टम के तहत पायलट को निर्धारित मेडिकल स्टैंडर्ड्स को पूरा करना होता है. डिफेंस पायलटों के लिए नियमों में कुछ विशेष प्रावधान और छूट हो सकती है, लेकिन नागरिक विमानन में आने के लिए लागू मेडिकल और लाइसेंसिंग आवश्यकताओं को पूरा करना जरूरी रहता है.
इसका सीधा मतलब है कि फाइटर जेट से पैसेंजर प्लेन तक का सफर सिर्फ नौकरी बदलने की कहानी नहीं, बल्कि एक पूरी रेगुलेटरी और ट्रेनिंग प्रोसेस है.