menu-icon
India Daily

गंगा के तेज बहाव में फंसे 18 कांवड़िए, SDRF ने ऐसे बचाई जान; हरिद्वार-ऋषिकेश में अलर्ट

हरिद्वार और ऋषिकेश के घाटों पर तैनात एसडीआरएफ ने गंगा में डूबने या तेज बहाव में फंसने की स्थिति में 18 कांवड़ यात्रियों को बचाया. अधिकारियों ने श्रद्धालुओं से सुरक्षित घाटों पर स्नान की अपील की है.

Kuldeep Sharma
Edited By: Kuldeep Sharma
गंगा के तेज बहाव में फंसे 18 कांवड़िए, SDRF ने ऐसे बचाई जान; हरिद्वार-ऋषिकेश में अलर्ट
Courtesy: SOCIAL MEDIA

सावन के दौरान गंगा घाटों पर बढ़ती भीड़ के बीच एसडीआरएफ की सतर्कता ने कई श्रद्धालुओं की जान बचाई. हरिद्वार और ऋषिकेश में तैनात टीम ने अलग-अलग घटनाओं में 18 कांवड़ यात्रियों को समय रहते सुरक्षित बाहर निकाला. अधिकारियों ने नदी के बदलते जलस्तर और तेज बहाव को देखते हुए लोगों से सावधानी बरतने को कहा है.

तेज बहाव में फंसे 18 श्रद्धालुओं को बचाया

हरिद्वार और ऋषिकेश के विभिन्न घाटों पर कांवड़ यात्रा को देखते हुए एसडीआरएफ की टीमें लगातार निगरानी कर रही हैं. इसी दौरान गंगा में स्नान करने पहुंचे 18 श्रद्धालु अचानक फिसल गए या तेज बहाव की चपेट में आ गए. स्थिति बिगड़ने से पहले घाटों पर मौजूद एसडीआरएफ कर्मियों ने तुरंत कार्रवाई की और सभी को सुरक्षित बाहर निकाल लिया. टीम की त्वरित प्रतिक्रिया से बड़ा हादसा टल गया. अधिकारियों के अनुसार, नदी में इस समय पानी का बहाव कई स्थानों पर तेज है और अचानक जलस्तर बदलने की स्थिति भी बन सकती है. इसलिए घाटों पर तैनात जवान लगातार लोगों की गतिविधियों पर नजर रख रहे हैं.

कमांडेंट ने श्रद्धालुओं से की सावधानी की अपील

एसडीआरएफ कमांडेंट अर्पण यादववंशी ने श्रद्धालुओं की सुरक्षा को सबसे महत्वपूर्ण बताते हुए लोगों से विशेष सावधानी बरतने की अपील की है. उन्होंने कहा कि गंगा या दूसरी नदियों में स्नान के लिए केवल निर्धारित और सुरक्षित घाटों का इस्तेमाल किया जाना चाहिए. उन्होंने लोगों को गहरे पानी और तेज धारा वाले हिस्सों में जाने से बचने की सलाह दी. कमांडेंट ने यह भी कहा कि नदी का स्वभाव अचानक बदल सकता है और कुछ ही समय में जलस्तर या बहाव में अंतर आ सकता है. ऐसे में किसी तरह का जोखिम लेना भारी पड़ सकता है. उन्होंने श्रद्धालुओं से एसडीआरएफ और पुलिसकर्मियों की ओर से जारी सुरक्षा निर्देशों का पालन करने को कहा.

11 अगस्त तक चलेगी कांवड़ यात्रा

कांवड़ यात्रा की शुरुआत 30 जुलाई 2026 को सावन महीने के साथ हुई थी और यह 11 अगस्त को मासिक शिवरात्रि तक जारी रहेगी. इस दौरान बड़ी संख्या में शिवभक्त हरिद्वार, गौमुख, गंगोत्री और सुल्तानगंज जैसे धार्मिक स्थलों से गंगाजल लेकर अपने क्षेत्रों की ओर रवाना होते हैं.

श्रद्धालु इस जल को अपने स्थानीय शिव मंदिरों या दूसरे प्रमुख शिवधामों में भगवान शिव को अर्पित करते हैं. यात्रा के दौरान हरिद्वार और ऋषिकेश जैसे प्रमुख स्थानों पर श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ने से नदी घाटों पर सुरक्षा व्यवस्था भी चुनौतीपूर्ण हो जाती है. इसी कारण प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियां लगातार निगरानी बढ़ा रही हैं और लोगों को निर्धारित रास्तों तथा सुरक्षित स्नान स्थलों का इस्तेमाल करने की सलाह दी जा रही है.

दिल्ली में भी ट्रैफिक को लेकर अलर्ट

कांवड़ यात्रा का असर केवल धार्मिक स्थलों तक सीमित नहीं है. बड़ी संख्या में कांवड़ियों के आवागमन को देखते हुए दिल्ली पुलिस ने भी पश्चिमी दिल्ली के कई मार्गों पर यातायात प्रभावित होने की संभावना जताई है. पुलिस ने लोगों को सलाह दी है कि यात्रा से पहले ट्रैफिक की स्थिति की जानकारी लें और जरूरत पड़ने पर वैकल्पिक मार्गों का इस्तेमाल करें.

कांवड़ शिविरों और श्रद्धालुओं की आवाजाही के कारण कुछ सड़कों पर सामान्य दिनों की तुलना में अधिक दबाव रह सकता है. अधिकारियों ने वाहन चालकों से ट्रैफिक कर्मियों के निर्देशों का पालन करने को कहा है. इस बीच गंगा घाटों पर एसडीआरएफ की तैनाती का उद्देश्य भीड़ के बीच किसी अप्रिय घटना को रोकना और आपात स्थिति में तुरंत बचाव करना है.