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प्रयागराज नहीं जा पा रहे? उत्तराखंड के इस संगम में लगाएं आस्था की डुबकी, पापों से मुक्ति की है मान्यता

प्रयागराज के त्रिवेणी संगम में स्नान करना संभव नहीं हो पा रहा है, तो उत्तराखंड के बागेश्वर का त्रिवेणी संगम धार्मिक आस्था का प्रमुख केंद्र माना जाता है.

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Edited By: Reepu Kumari
प्रयागराज नहीं जा पा रहे? उत्तराखंड के इस संगम में लगाएं आस्था की डुबकी, पापों से मुक्ति की है मान्यता
Courtesy: Pinterest

नई दिल्ली: अगर किसी वजह से प्रयागराज के त्रिवेणी संगम तक पहुंचना संभव नहीं हो पा रहा है, तो उत्तराखंड के बागेश्वर में स्थित त्रिवेणी संगम श्रद्धालुओं के लिए आस्था का बड़ा केंद्र है. स्थानीय धार्मिक मान्यताओं के अनुसार यहां सरयू, गोमती और अदृश्य सरस्वती का संगम होता है. पंडित कैलाश उपाध्याय के अनुसार, इस संगम में स्नान करने से पापों के नाश और आध्यात्मिक शांति की मान्यता है. यही वजह है कि यहां हर साल बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं. बागेश्वर का संगम धार्मिक महत्व के साथ ऐतिहासिक पहचान भी रखता है. संगम के पास स्थित बाबा बागनाथ मंदिर इस क्षेत्र की आस्था का प्रमुख केंद्र है. मान्यता है कि संगम में स्नान करने के बाद भगवान शिव के इस प्राचीन मंदिर में दर्शन और पूजा करने से श्रद्धालुओं की मनोकामनाएं पूरी होती हैं. सुख समृद्धि और शांति की कामना लेकर लोग यहां धार्मिक अनुष्ठान करते हैं. संगम और मंदिर दोनों मिलकर इस स्थान को विशेष बनाते हैं.

माघ महीने में बढ़ जाता है धार्मिक महत्व

धार्मिक मान्यताओं में माघ महीने के दौरान संगम स्नान को विशेष महत्व दिया गया है. मकर संक्रांति से शुरू होने वाले उत्तरायणी मेले में बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां पहुंचते हैं. कई लोग ब्रह्ममुहूर्त में संगम पर स्नान करते हैं. सावन में भी भगवान शिव के भक्त बागेश्वर आते हैं. सोमवार और शिवरात्रि के अवसर पर बाबा बागनाथ मंदिर तथा संगम क्षेत्र में श्रद्धालुओं की भीड़ बढ़ जाती है और पूरा क्षेत्र धार्मिक माहौल में नजर आता है.

स्नान के बाद करते हैं पूजा और तर्पण

स्थानीय मान्यताओं के अनुसार ब्रह्ममुहूर्त में संगम में स्नान करने को विशेष पुण्यदायी माना जाता है. श्रद्धालु डुबकी लगाने के बाद नदी के किनारे पूजा अर्चना करते हैं. कई लोग तर्पण और दान पुण्य जैसे धार्मिक कार्य भी करते हैं. पूर्वजों की आत्मा की शांति के लिए भी यहां अनुष्ठान किए जाते हैं. इसी वजह से बागेश्वर का संगम केवल घूमने की जगह नहीं, बल्कि धार्मिक आस्था और परंपराओं से जुड़ा महत्वपूर्ण स्थल माना जाता है.

पहाड़ों के बीच आध्यात्मिक अनुभव

बागेश्वर त्रिवेणी संगम की खासियत केवल धार्मिक मान्यताओं तक सीमित नहीं है. यहां आसपास फैली पहाड़ियों की हरियाली, बहती नदियों की आवाज और शांत वातावरण लोगों को आकर्षित करता है. संगम क्षेत्र का प्राकृतिक सौंदर्य धार्मिक यात्रा को अलग अनुभव देता है. यही कारण है कि श्रद्धालुओं के अलावा प्रकृति प्रेमी और पर्यटक भी यहां पहुंचते हैं. पहाड़ी वातावरण में नदी और मंदिरों की मौजूदगी इस जगह को कुमाऊं के खास स्थलों में शामिल करती है.

कुमाऊं की आस्था का प्रमुख केंद्र

बागेश्वर का त्रिवेणी संगम कुमाऊं की धार्मिक पहचान से गहराई से जुड़ा हुआ है. प्रयागराज जाना संभव न होने पर श्रद्धालु यहां आकर अपनी आस्था के अनुसार संगम स्नान और पूजा अर्चना करते हैं. स्थानीय विश्वास में स्नान के साथ बाबा बागनाथ के दर्शन का भी विशेष महत्व है. यही धार्मिक परंपराएं बागेश्वर को उत्तराखंड के प्रमुख तीर्थ स्थलों में अलग पहचान देती हैं. संगम, मंदिर और प्राकृतिक वातावरण मिलकर यहां की धार्मिक यात्रा को खास बनाते हैं.