कुमाऊं के प्रवेशद्वार हल्द्वानी से कालाढूंगी जाने वाले लोगों के लिए आने वाले समय में सफर का तरीका बदल सकता है. लोक निर्माण विभाग इस मार्ग को टू लेन से फोरलेन करने की योजना पर गंभीरता से विचार कर रहा है. करीब 29 किलोमीटर लंबे इस रास्ते पर आबादी और यातायात लगातार बढ़ रहा है. ऐसे में सड़क चौड़ी करने की जरूरत महसूस की जा रही है. योजना आगे बढ़ी तो जाम और यातायात दबाव से राहत मिल सकती है.
इस मार्ग का इस्तेमाल केवल स्थानीय लोग ही नहीं करते. रामनगर, काशीपुर, जसपुर, हरिद्वार, देहरादून और गढ़वाल के पर्वतीय क्षेत्रों से आने जाने वाले लोग भी इसी रास्ते का इस्तेमाल करते हैं. उत्तर प्रदेश के नजीबाबाद और बिजनौर से हल्द्वानी पहुंचने वालों के लिए भी यह मार्ग महत्वपूर्ण है. इसके अलावा कॉर्बेट पार्क जाने वाले पर्यटकों को भी इसी रास्ते से गुजरना पड़ता है. कालाढूंगी में मुख्य बाजार और तहसील होने से यहां यातायात का दबाव और बढ़ जाता है.
फिलहाल हल्द्वानी से कालाढूंगी के बीच सड़क करीब सात मीटर चौड़ी है, जिसे टू लेन के तौर पर इस्तेमाल किया जा रहा है. विभागीय योजना के तहत इसे फोरलेन करने पर डामर वाला हिस्सा करीब 14 मीटर चौड़ा हो जाएगा. लोक निर्माण विभाग के अधिशासी अभियंता प्रत्यूष कुमार के अनुसार, सड़क चौड़ीकरण को लेकर विभागीय स्तर पर गंभीरता से मंथन चल रहा है. सर्वे आगे बढ़ने के बाद परियोजना से जुड़ी जमीन की स्थिति भी स्पष्ट होगी.
इस मार्ग पर वाहनों की संख्या भी सड़क चौड़ीकरण की जरूरत को सामने रखती है. पूर्व में किए गए यातायात सर्वे में लामाचौड़ क्षेत्र में रोजाना 9,729 वाहनों की आवाजाही दर्ज की गई थी. वहीं कालाढूंगी से आगे नयागांव क्षेत्र में यह संख्या 21,870 वाहन प्रतिदिन तक पहुंची. बढ़ते यातायात के बीच मौजूदा सड़क पर दबाव लगातार बढ़ रहा है. इसी वजह से फोरलेन की योजना को लेकर विभागीय स्तर पर विचार किया जा रहा है.
सड़क को चौड़ा करने की प्रक्रिया में वनभूमि के साथ निजी जमीन भी महत्वपूर्ण होगी. सर्वे की प्रक्रिया आगे बढ़ने पर दोनों तरह की जमीन की पैमाइश की जाएगी. इसके बाद जरूरत के अनुसार भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया आगे बढ़ सकती है. यानी फिलहाल योजना विचार और सर्वे के स्तर पर है. परियोजना की वास्तविक प्रगति आगे होने वाले सर्वे, भूमि की स्थिति और विभागीय निर्णय पर निर्भर करेगी.
हल्द्वानी के गौलापार से चोरगलिया तक करीब 30 किलोमीटर सड़क को फोरलेन करने के लिए भी विभागीय सर्वे चल रहा है. इस हिस्से में पेड़ों की गणना की जा चुकी है और करीब सात हजार पेड़ इसकी जद में आने की बात सामने आई है. चोरगलिया के बाद सितारगंज सीमा शुरू होने पर आगे खटीमा तक सड़क चौड़ीकरण की जिम्मेदारी भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण के पास होगी. गौलापार चोरगलिया हिस्से की लागत का आकलन अभी बाकी है.