उत्तराखंड के बेसिक और जूनियर विद्यालयों में कार्यरत हजारों शिक्षकों के लिए बड़ी राहत की खबर सामने आई है. मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अध्यापक पात्रता परीक्षा यानी टीईटी के मानकों में बदलाव के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है. इस फैसले से राज्य के करीब 20 हजार शिक्षकों को सीधा लाभ मिलने की उम्मीद है. शिक्षा विभाग के प्रस्ताव के अनुसार शिक्षा का अधिकार कानून लागू होने से पहले नियुक्त शिक्षकों को टीईटी परीक्षा में शामिल होने के लिए पात्र माना जाएगा. अब तक कई शिक्षक वर्तमान नियमों के कारण टीईटी के लिए आवेदन नहीं कर पा रहे थे. शिक्षा सचिव रविनाथ रमन ने बताया कि सरकार जल्द ही टीईटी को लेकर संशोधित और व्यापक शासनादेश जारी करने जा रही है. इसके लिए अंतिम स्तर पर तैयारियां पूरी की जा रही हैं.
सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुसार 31 अगस्त 2028 तक प्रत्येक शिक्षक को शिक्षा का अधिकार कानून के तहत निर्धारित मानकों को पूरा करना होगा. इसका मतलब है कि राज्य के सभी शिक्षकों के लिए टीईटी उत्तीर्ण करना अनिवार्य होगा. हालांकि जिन शिक्षकों की सेवा अवधि पांच वर्ष या उससे कम बची है, उन्हें टीईटी से छूट मिलेगी. लेकिन यदि वे पदोन्नति चाहते हैं तो उन्हें भी टीईटी परीक्षा पास करनी होगी.
वर्तमान नियमों के अनुसार केवल स्नातक और डीएलएड प्रशिक्षित अभ्यर्थी ही टीईटी परीक्षा के लिए आवेदन कर सकते हैं. लेकिन उत्तराखंड में वर्ष 2010 से पहले बड़ी संख्या में बीएड और विशिष्ट बीटीसी योग्यता वाले शिक्षकों की नियुक्ति हुई थी. सरकार के नए फैसले के बाद ऐसे शिक्षक भी टीईटी परीक्षा में शामिल हो सकेंगे. इससे लंबे समय से नियमों में बदलाव की मांग कर रहे शिक्षकों को राहत मिलेगी.
शिक्षा विभाग ने यह भी तय किया है कि राज्य में हर वर्ष कम से कम दो बार टीईटी परीक्षा आयोजित की जाएगी. जरूरत पड़ने पर परीक्षाओं की संख्या और भी बढ़ाई जा सकती है. सरकार का मानना है कि नियमित परीक्षा आयोजित होने से शिक्षकों को समय पर अवसर मिलेगा और वे निर्धारित समय सीमा के भीतर आवश्यक योग्यता हासिल कर सकेंगे. TET के मानकों में बदलाव का सबसे बड़ा लाभ उन शिक्षकों को मिलेगा जो पदोन्नति की प्रतीक्षा कर रहे हैं. नए नियम लागू होने के बाद बड़ी संख्या में शिक्षक टीईटी परीक्षा देकर अपने करियर में आगे बढ़ सकेंगे.
शिक्षा सचिव रविनाथ रमन के अनुसार मुख्यमंत्री ने शिक्षकों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए इस प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है. कुछ आवश्यक संशोधनों के बाद जल्द ही इसका अंतिम शासनादेश जारी कर दिया जाएगा. राज्य सरकार के इस फैसले को शिक्षा क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है. इससे हजारों शिक्षकों के सामने खड़ी तकनीकी बाधाएं दूर होंगी और उन्हें अपने भविष्य को बेहतर बनाने का अवसर मिलेगा.