भारत दौरे पर आए दक्षिण अफ्रीका के पूर्व राष्ट्रपति जैकब जूमा ने पहली बार उत्तराखंड के हरिद्वार पहुंचकर सिद्धपीठ दक्षिण काली मंदिर में दर्शन किए. उन्होंने विशेष पूजा-अर्चना कर चुनावी सफलता की प्रार्थना की और भारत की आध्यात्मिक परंपरा की खुलकर सराहना की.
हरिद्वार पहुंचने के बाद जैकब जूमा सीधे सिद्धपीठ दक्षिण काली मंदिर पहुंचे. मंदिर परिसर में उनका पारंपरिक तरीके से स्वागत किया गया. उन्होंने मां दक्षिण काली के दर्शन किए और विशेष पूजा-अर्चना में भाग लिया. पूजा के दौरान उन्होंने अपने आगामी राजनीतिक सफर के लिए आशीर्वाद मांगा. इसके बाद उन्होंने पूज्य महामंडलेश्वर से मुलाकात कर उनका आशीर्वाद भी लिया. मंदिर प्रशासन ने उन्हें प्रसाद भेंट किया और पूरे विधि-विधान के साथ धार्मिक कार्यक्रम संपन्न कराया. जूमा ने मंदिर के शांत और आध्यात्मिक माहौल की सराहना करते हुए इसे यादगार अनुभव बताया.
मीडिया से बातचीत में जैकब जूमा ने कहा कि वे पहले भी कई बार भारत आ चुके हैं लेकिन हरिद्वार आने का यह उनका पहला अवसर है. उन्होंने कहा कि यहां का वातावरण मन को शांति देने वाला है और भारतीय संस्कृति दुनिया के लिए प्रेरणा का स्रोत है. मंदिर भ्रमण के दौरान महामंडलेश्वर कैलाशानंद गिरी ने उन्हें मंदिर की परंपराओं और धार्मिक महत्व की जानकारी दी. इस दौरान दोनों के बीच भारत और दक्षिण अफ्रीका के सांस्कृतिक तथा आध्यात्मिक संबंधों पर भी विस्तार से चर्चा हुई.
महामंडलेश्वर कैलाशानंद गिरी ने बताया कि दक्षिण अफ्रीका में नवंबर में स्थानीय निकाय चुनाव प्रस्तावित हैं, जबकि वर्ष 2029 में राष्ट्रपति पद के चुनाव होने हैं. जैकब जूमा ने मां दक्षिण काली के सामने संकल्प लिया कि यदि उन्हें फिर से राष्ट्रपति बनने का अवसर मिलता है तो वे सबसे पहले भारत आकर इसी मंदिर में पूजा करेंगे. उन्होंने कहा कि आस्था व्यक्ति को सकारात्मक ऊर्जा देती है और जीवन में आगे बढ़ने की प्रेरणा भी.