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कैलास मानसरोवर के दिव्य दर्शन कर लौटे श्रद्धालु, साझा किए यादगार अनुभव; बताई सुविधाएं और चुनौतियां

कैलास मानसरोवर यात्रा का पहला दल सुरक्षित रूप से पिथौरागढ़ लौट आया है. श्रद्धालुओं ने यात्रा को अविस्मरणीय बताया और व्यवस्थाओं की सराहना करते हुए कुछ सुधार संबंधी सुझाव भी दिए.

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Km Jaya

पिथौरागढ़: कैलास मानसरोवर यात्रा का पहला दल सुरक्षित रूप से उत्तराखंड के पिथौरागढ़ पहुंच गया है. तवाघाट लिपुलेख हाईवे भूस्खलन के कारण बंद होने से यात्रियों को गुंजी और बूंदी में दो दिन तक रुकना पड़ा था. मार्ग खुलने के बाद दल देर शाम पिथौरागढ़ पहुंचा. अब सभी यात्री मंगलवार को सीधे दिल्ली के लिए रवाना होंगे. यात्रियों ने कैलास मानसरोवर के दर्शन को जीवन का अविस्मरणीय अनुभव बताया और कहा कि यह यात्रा हमेशा उनके मन में बस गई है.

श्रद्धालुओं ने बताया कि भारत और तिब्बत दोनों ओर यात्रा की व्यवस्थाएं संतोषजनक रहीं. हालांकि मानसरोवर परिक्रमा मार्ग पर बने तीन पड़ावों में शौचालय और स्नानागार की व्यवस्था बेहतर किए जाने की जरूरत है. यात्रियों का कहना है कि कमरों की सुविधा अच्छी है, लेकिन शौचालय और स्नानागार बाहर होने से काफी असुविधा होती है. उन्होंने सुझाव दिया कि भारत सरकार इस विषय पर चीन से बातचीत करे.

यात्रियों ने और क्या बताया?

यात्रियों ने यह भी बताया कि मानसरोवर शिविर में रात आठ बजे के बाद सुबह तक प्रकाश की पर्याप्त व्यवस्था नहीं रहती. इसके अलावा तिब्बत क्षेत्र में भाषा की समस्या भी कई बार सामने आती है. इसके बावजूद चीन के अधिकारियों और सुरक्षा कर्मियों का व्यवहार सहयोगपूर्ण रहा, जिससे यात्रा सुगम बनी रही.


इस बार क्या मिली खास सुविधा?

इस बार की यात्रा में भारतीय रसोइयों को साथ ले जाने की अनुमति मिलने से श्रद्धालुओं को अपनी पसंद का देशी भोजन उपलब्ध हुआ. यात्रियों ने इस फैसले की सराहना करते हुए कहा कि इससे यात्रा के दौरान काफी सुविधा मिली. उन्होंने भारत तिब्बत सीमा पुलिस, भारतीय सेना और सीमा सड़क संगठन की भी प्रशंसा की और कठिन परिस्थितियों में उनके सहयोग के लिए धन्यवाद दिया.

यात्रियों ने धारचूला में यातायात व्यवस्था को और बेहतर बनाने की आवश्यकता भी जताई. साथ ही गुंजी से लिपुलेख तक सड़क निर्माण के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का आभार व्यक्त किया. गुजरात के गांधीनगर से आए सबसे युवा यात्री हरिकृष्ण ने अपनी माता शिल्पा बा के साथ सफलतापूर्वक परिक्रमा पूरी की. वहीं पिथौरागढ़ के भूपेश पंत और दिल्ली के विजयेंद्र सोलंकी ने भारत के विदेश मंत्रालय और चीन प्रशासन के बीच बेहतर समन्वय की सराहना की.

भूस्खलन के कारण यात्रा में दो दिन की देरी होने से वापसी का कार्यक्रम बदला गया. पहले दल को चौकोड़ी और अल्मोड़ा होते हुए दिल्ली जाना था, लेकिन कई यात्रियों के पहले से रेल और हवाई यात्रा के आरक्षण होने के कारण उन्हें धारचूला से सीधे पिथौरागढ़ लाकर दिल्ली रवाना करने का निर्णय लिया गया.