menu-icon
India Daily

उत्तराखंड में तेजी से बढ़ेंगे EV, 5 साल में 15 गुना तक बढ़ सकती है चार्जिंग के लिए बिजली की खपत

EV और हाइब्रिड वाहनों को बढ़ावा मिलने से उत्तराखंड में परिवहन क्षेत्र बिजली का नया बड़ा उपभोक्ता बन सकता है. अनुमान है कि 2028-29 तक ईवी चार्जिंग में बिजली की खपत मौजूदा स्तर से करीब 15 गुना बढ़ सकती है.

shanu
Edited By: Shanu Sharma
उत्तराखंड में तेजी से बढ़ेंगे EV, 5 साल में 15 गुना तक बढ़ सकती है चार्जिंग के लिए बिजली की खपत
Courtesy: AI

केंद्र सरकार की ओर से प्रस्तावित कारपोरेट औसत ईंधन दक्षता-2027 मानकों का मुख्य उद्देश्य वाहनों की औसत ईंधन खपत और कार्बन उत्सर्जन को कम करना है. नए नियमों के तहत वाहन कंपनियों को बेहतर माइलेज और कम प्रदूषण वाले वाहनों को बढ़ावा देने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा.

प्रस्तावित व्यवस्था वित्तीय वर्ष 2027-28 से 2031-32 तक लागू करने की योजना है. इसमें कंपनियों की कुल बिक्री के आधार पर औसत ईंधन खपत और कार्बन उत्सर्जन का आकलन किया जाएगा. तय मानकों से बेहतर प्रदर्शन करने वाली कंपनियों को क्रेडिट और पीछे रहने वाली कंपनियों को डेबिट का प्रावधान होगा.

ईवी को मिलेगा सबसे ज्यादा प्रोत्साहन

नई व्यवस्था में बैटरी इलेक्ट्रिक वाहन और रेंज एक्सटेंडेड इलेक्ट्रिक वाहन को तीन गुना तक सुपर क्रेडिट देने का प्रस्ताव है. इससे वाहन कंपनियों के लिए ईवी का उत्पादन और बिक्री बढ़ाना अधिक आकर्षक हो सकता है. इसके अलावा प्लग-इन हाइब्रिड इलेक्ट्रिक वाहन के लिए 2.5, स्ट्रांग हाइब्रिड के लिए 1.6 और फ्लेक्स-फ्यूल वाहन के लिए 1.1 सुपर क्रेडिट प्रस्तावित किया गया है. इसका सीधा असर देश के साथ उत्तराखंड के वाहन बाजार पर भी पड़ने की संभावना है.

चार्जिंग बढ़ी तो बिजली की मांग भी बढ़ेगी

उत्तराखंड में ईवी की संख्या बढ़ने के साथ चार्जिंग केंद्रों पर बिजली का अतिरिक्त भार आएगा. खासकर चारधाम मार्गों पर चार्जिंग नेटवर्क के विस्तार से स्थानीय स्तर पर बिजली की मांग बढ़ सकती है. यदि एक ही समय में बड़ी संख्या में वाहन चार्ज किए जाते हैं तो बिजली की अधिकतम मांग भी बढ़ेगी. इसे देखते हुए यूपीसीएल ईवी चार्जिंग से बढ़ने वाले लोड के प्रबंधन की तैयारी कर रहा है.

ईवी की संख्या बढ़ने का अर्थ है कि परिवहन के लिए इस्तेमाल होने वाली ऊर्जा का एक बड़ा हिस्सा बिजली से पूरा होगा. इससे अभी तक मुख्य रूप से घरेलू, व्यावसायिक और औद्योगिक क्षेत्र पर निर्भर बिजली मांग में परिवहन क्षेत्र की हिस्सेदारी भी बढ़ेगी.

पांच साल में बदल सकता है तस्वीर

उत्तराखंड में फिलहाल कुल 1,02,702 इलेक्ट्रिक वाहन पंजीकृत हैं. वित्तीय वर्ष 2025-26 में 21,272 नए ईवी पंजीकृत हुए. वर्तमान में ईवी चार्जिंग में करीब 15.7 लाख यूनिट बिजली सालाना खर्च हो रही है. आकलन के मुताबिक 2028-29 तक यह खपत बढ़कर 234.8 लाख यूनिट सालाना तक पहुंच सकती है. यानी मौजूदा खपत की तुलना में करीब 15 गुना वृद्धि संभव है. ऐसे में ईवी का विस्तार केवल परिवहन व्यवस्था को ही नहीं बदलेगा, बल्कि उत्तराखंड की बिजली व्यवस्था और भविष्य की ऊर्जा मांग का स्वरूप भी बदल सकता है.