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'राष्ट्रहित और स्वराज के प्रति उनका समर्पण आज भी प्रेरणास्रोत', दादाभाई नौरोजी की पुण्यतिथि पर सीएम धामी ने किया नमन

उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने महान शिक्षाविद्, राष्ट्रवादी चिंतक और 'ग्रैंड ओल्ड मैन ऑफ इंडिया' के नाम से प्रसिद्ध दादाभाई नौरोजी की पुण्यतिथि पर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की.

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Edited By: Shanu Sharma
'राष्ट्रहित और स्वराज के प्रति उनका समर्पण आज भी प्रेरणास्रोत', दादाभाई नौरोजी की पुण्यतिथि पर सीएम धामी ने किया नमन
Courtesy: ANI

उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने महान शिक्षाविद्, प्रखर राष्ट्रवादी चिंतक और भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के अग्रदूत दादाभाई नौरोजी की पुण्यतिथि पर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की. मुख्यमंत्री ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया अकाउंट पर एक संदेश साझा करते हुए दादाभाई नौरोजी के राष्ट्र निर्माण में दिए गए अमूल्य योगदान को याद किया.

सीएम धामी ने कहा कि राष्ट्रहित, स्वराज तथा जनसेवा के प्रति उनका समर्पण आज भी हर भारतीय के लिए प्रेरणा का स्रोत है. मुख्यमंत्री ने अपने संदेश में लिखा कि महान शिक्षाविद्, प्रखर राष्ट्रवादी चिंतक एवं 'ग्रैंड ओल्ड मैन ऑफ इंडिया' के नाम से विख्यात दादाभाई नौरोजी की पुण्यतिथि पर कोटिशः नमन. राष्ट्रहित, स्वराज और जनसेवा के प्रति आपका समर्पण हमारे लिए प्रेरणास्रोत है.

स्वतंत्रता आंदोलन के प्रमुख स्तंभ थे दादाभाई नौरोजी

दादाभाई नौरोजी को भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के शुरुआती दौर के सबसे प्रभावशाली नेताओं में गिना जाता है. उन्होंने देश में राजनीतिक जागरूकता फैलाने के साथ-साथ ब्रिटिश शासन की आर्थिक नीतियों की गहन आलोचना की. उनके विचारों ने भारतीय राष्ट्रीय चेतना को नई दिशा देने का कार्य किया और स्वराज की अवधारणा को मजबूत आधार प्रदान किया. नौरोजी ने भारतीयों के अधिकारों की आवाज न केवल देश में बल्कि ब्रिटेन की संसद तक पहुंचाई. वे ब्रिटिश संसद के लिए निर्वाचित होने वाले पहले भारतीय भी थे. उन्होंने अपने लेखन और भाषणों के माध्यम से यह बताने का प्रयास किया कि औपनिवेशिक शासन की आर्थिक नीतियों से भारत को किस प्रकार नुकसान पहुंच रहा है.

राष्ट्रसेवा और जनकल्याण के मूल्यों को किया स्थापित

मुख्यमंत्री धामी ने अपने संदेश के माध्यम से इस बात पर जोर दिया कि दादाभाई नौरोजी का जीवन राष्ट्रसेवा, जनकल्याण और सामाजिक जागरूकता का उत्कृष्ट उदाहरण है. उन्होंने शिक्षा, सामाजिक सुधार और राष्ट्रीय एकता को मजबूत बनाने के लिए लगातार कार्य किया. उनके विचार आज भी युवाओं को देशहित में कार्य करने और समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारियों को समझने की प्रेरणा देते हैं. उन्होंने कहा कि महान विभूतियों का जीवन समाज को नई दिशा देने का कार्य करता है और उनके आदर्शों को आत्मसात कर राष्ट्र निर्माण की प्रक्रिया को और मजबूत बनाया जा सकता है.