उत्तराखंड में विशेष गहन पुनरीक्षण अभियान के तहत ड्राफ्ट मतदाता सूची प्रकाशित होने के बाद निर्वाचन आयोग ने दावे और आपत्तियों की प्रक्रिया को गति दे दी है. मुख्य निर्वाचन अधिकारी डा. बीवीआरसी पुरुषोत्तम ने कहा कि मतदाता सूची को अधिक पारदर्शी और त्रुटिरहित बनाने के लिए स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं.
अधिकारी ने बताया कि कोई भी व्यक्ति फॉर्म-7 के माध्यम से अधिकतम पांच मतदाताओं के नाम हटाने का आवेदन कर सकता है. आवेदन के बाद संबंधित निर्वाचक पंजीकरण अधिकारी प्रत्येक मामले की व्यक्तिगत जांच कराएंगे. इस व्यवस्था का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि कोई भी व्यक्ति किसी पूरे परिवार या समूह के नाम एक साथ हटाने का प्रयास न कर सके.
सचिवालय में आयोजित बैठक में बुधवार को मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने मान्यता प्राप्त राष्ट्रीय राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों को ड्राफ्ट मतदाता सूची की डिजिटल प्रति सौंपी. बैठक में उन्होंने बताया कि विशेष गहन पुनरीक्षण के प्रथम चरण के पूरा होने के बाद 14 जुलाई को प्रदेश की ड्राफ्ट मतदाता सूची प्रकाशित कर दी गई थी. इस सूची में कुल 71,33,785 मतदाताओं के नाम शामिल किए गए हैं. वहीं लगभग 8.26 लाख मतदाताओं को अनुपस्थित, स्थानांतरित और संदिग्ध श्रेणी में चिह्नित किया गया है, जिनकी अलग से जांच की जाएगी.
निर्वाचन विभाग के अनुसार 14 जुलाई से 13 अगस्त तक मतदाता सूची से संबंधित दावे और आपत्तियां स्वीकार की जाएंगी. इसके बाद 14 जुलाई से 11 सितंबर तक नोटिस जारी करने, जांच करने और सभी दावों एवं आपत्तियों का निस्तारण किया जाएगा. संशोधित और अंतिम मतदाता सूची का प्रकाशन 15 सितंबर 2026 को किया जाएगा. मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने बताया कि ड्राफ्ट मतदाता सूची में शामिल करीब 19 लाख मतदाताओं के विवरण में विभिन्न प्रकार की त्रुटियां और विसंगतियां सामने आई हैं.
इन मामलों में संबंधित ईआरओ और सहायक निर्वाचक पंजीकरण अधिकारी संबंधित मतदाताओं को नोटिस जारी करेंगे ताकि आवश्यक सुधार किए जा सकें. इसके साथ ही प्रत्येक बूथ स्तर अधिकारी को नए मतदाताओं का पंजीकरण कराने के लिए 100-100 आवेदन पत्र उपलब्ध कराए जाएंगे. इससे ऐसे पात्र नागरिक, जिनका नाम किसी कारणवश सूची में शामिल नहीं हो पाया है, दोबारा आवेदन कर सकेंगे.