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हिमालय में श्रद्धालुओं का सैलाब, आज से चार धाम यात्रा का शुभारंभ; इन नियमों का करना होगा पालन

आस्था, श्रद्धा और आध्यात्मिक ऊर्जा से भरी चार धाम यात्रा का आज भव्य आगाज हो रहा है. हर साल लाखों श्रद्धालु इस पवित्र यात्रा का इंतजार करते हैं. इस बार भी यात्रा का शुभारंभ अक्षय तृतीया के साथ होगा.

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Meenu Singh

नई दिल्ली: आस्था, श्रद्धा और आध्यात्मिक ऊर्जा से भरी चार धाम यात्रा का आज भव्य आगाज हो रहा है. हर साल लाखों श्रद्धालु इस पवित्र यात्रा का इंतजार करते हैं, और इस बार भी अक्षय तृतीया के शुभ अवसर पर हिमालय की गोद में बसे इन धामों के कपाट खुलने के साथ यह यात्रा शुरू हो रही है.

पहले दिन यानी अक्षय तृतीया के दिन के पूरे विधि विधान के साथ गंगोत्री धाम के कपाट दोपहर 12:15 बजे और यमुनोत्री धाम के कपाट 12:35 बजे खोले जाएंगे. इसके बाद केदारनाथ मंदिर 22 अप्रैल को सुबह 8 बजे और बदरीनाथ मंदिर 23 अप्रैल को सुबह 6:15 बजे श्रद्धालुओं के लिए खुलेंगे.

भीड़ नियंत्रण के लिए की जाएगी नई व्यवस्था

इस बार यात्रा को अधिक व्यवस्थित बनाने के लिए कई बदलाव किए गए हैं. श्रद्धालुओं की संख्या को नियंत्रित करने के लिए कैमरों के जरिए हेड काउंट किया जाएगा और दर्शन के लिए टोकन सिस्टम लागू किया गया है. इससे भीड़भाड़ कम करने में मदद मिलेगी.

हाई-टेक निगरानी सिस्टम

गौरीकुंड से केदारनाथ तक पूरे मार्ग पर सुरक्षा बढ़ा दी गई है. यहां एक आधुनिक कमांड एंड कंट्रोल सेंटर बनाया गया है, जहां से 24 घंटे निगरानी की जाएगी. 360-डिग्री कैमरे और अतिरिक्त सीसीटीवी कैमरों के जरिए हर गतिविधि पर नजर रखी जाएगी.

रील और फोटोग्राफी पर सख्ती

धार्मिक स्थल की गरिमा बनाए रखने के लिए मंदिर परिसर के करीब 70 मीटर के दायरे में वीडियो या रील बनाने पर प्रतिबंध लगा दिया गया है. नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ सख्त कार्यवाही की जाएगी. श्रद्धालुओं के लिए मोबाइल और कैमरे रखने की सुविधा भी उपलब्ध कराई गई है.

दर्शन की सीमा हटाई गई

इस बार एक बड़ा बदलाव यह भी है कि हर दिन दर्शन करने वाले श्रद्धालुओं की अधिकतम संख्या की सीमा हटा दी गई है. बढ़ती भीड़ को देखते हुए सरकार ने यह फैसला लिया है, ताकि ज्यादा से ज्यादा लोग दर्शन कर सकें.

पंचगव्य ग्रहण अनिवार्य

गंगोत्री धाम और यमुनोत्री धाम में आने वाले श्रद्धालुओं के लिए पंचगव्य ग्रहण करना अनिवार्य किया गया है. यह दूध, दही, घी, गोमूत्र और गोबर से मिलकर तैयार किया जाता है, जिसे धार्मिक दृष्टि से पवित्र माना जाता है.