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10 साल का इंतजार खत्म! Central Hope Town के 1,188 खाते भूलेख पर ऑनलाइन; अब घर बैठे मिलेगी खतौनी

सेंट्रल होप टाउन के 1,188 खतौनी खाते अब भूलेख पोर्टल पर ऑनलाइन हो गए हैं. 8 10 साल से लंबित बंदोबस्ती प्रक्रिया पूरी होने के बाद 25 अगस्त से लोग घर बैठे अपना भूमि रिकॉर्ड देख सकेंगे. जानिए इससे दाखिल खारिज, विरासत और बैंक लोन जैसे कामों में क्या फायदा होगा.

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Edited By: Babli Rautela
10 साल का इंतजार खत्म! Central Hope Town के 1,188 खाते भूलेख पर ऑनलाइन; अब घर बैठे मिलेगी खतौनी
Courtesy: X

उत्तराखंड के सेलाकुई क्षेत्र स्थित मौजा सेंट्रल होप टाउन के लोगों को करीब एक दशक बाद बड़ी राहत मिली है. 8 से 10 वर्षों से बंदोबस्ती प्रक्रिया के चलते लंबित चल रहे भूमि अभिलेख अब ऑनलाइन कर दिए गए हैं. 1,188 खातों की खतौनी भूलेख पोर्टल पर उपलब्ध होने के बाद क्षेत्र की करीब 25 से 30 हजार आबादी को इसका सीधा लाभ मिलने की उम्मीद है.

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देश के बाद शासन और जिला प्रशासन ने निर्धारित 2 महीने की समयसीमा से पहले ही यह काम पूरा कर लिया. 25 अगस्त को सेंट्रल होप टाउन की खतौनी ऑनलाइन सार्वजनिक कर दी गई. अधिकारियों के मुताबिक, मुख्यमंत्री के निर्देश मिलने के करीब 45 दिन के भीतर पूरी प्रक्रिया पूरी की गई.

ऑनलाइन रिकॉर्ड नहीं होने से परेशान थे लोग

सेंट्रल होप टाउन में लंबे समय से खतौनी का ऑनलाइन रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं था. इसका असर लोगों के रोजमर्रा के कई जरूरी कामों पर पड़ रहा था. दाखिल खारिज, विरासत दर्ज कराने, जमीन के आधार पर बैंक लोन लेने, स्थायी निवास और जाति प्रमाण पत्र बनवाने जैसे कामों में भूमि अभिलेख की जरूरत होती है. रिकॉर्ड ऑनलाइन नहीं होने के कारण लोगों को संबंधित राजस्व कार्यालयों के चक्कर लगाने पड़ते थे. दस्तावेज जुटाने से लेकर उनके सत्यापन तक की प्रक्रिया में अतिरिक्त समय और मेहनत लगती थी.

खासकर जमीन के स्वामित्व से जुड़े मामलों और बैंकिंग कार्यों में डिजिटल रिकॉर्ड नहीं होने के कारण लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा था. अब ऑनलाइन खतौनी उपलब्ध होने से इन प्रक्रियाओं को आसान बनाने में मदद मिलेगी.

मुख्यमंत्री के सामने उठाया गया था मामला

सेंट्रल होप टाउन के लोगों ने 11 जुलाई को 'जन जन की सरकार, जन जन के द्वार' कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के सामने यह समस्या रखी थी. क्षेत्रवासियों ने बताया था कि वर्षों से बंदोबस्ती प्रक्रिया पूरी नहीं होने के कारण खतौनी ऑनलाइन नहीं हो पा रही है. मुख्यमंत्री ने मामले का संज्ञान लेते हुए अधिकारियों को दो महीने के भीतर हर हाल में रिकॉर्ड ऑनलाइन करने के निर्देश दिए थे. इसके बाद प्रशासन ने बंदोबस्ती से संबंधित प्रक्रिया को तेजी से आगे बढ़ाया और पुराने राजस्व अभिलेखों को डिजिटल रूप में भूलेख प्रणाली पर दर्ज किया.

प्रशासनिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद 1,188 खातों को भूलेख पोर्टल पर ऑनलाइन दर्ज किया गया है. 25 अगस्त से इन रिकॉर्ड को सार्वजनिक कर दिया गया है. इससे अब लोगों को अपनी जमीन से संबंधित रिकॉर्ड देखने और प्राप्त करने के लिए हर बार राजस्व कार्यालय जाने की जरूरत नहीं होगी. भूलेख पोर्टल के माध्यम से वे घर बैठे अपनी खतौनी देख सकेंगे.