सावन का महीना भगवान शिव की भक्ति और आस्था के लिए बेहद खास माना जाता है. इसी बीच उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने ऊधम सिंह नगर के सीमावर्ती क्षेत्र में स्थित प्राचीन श्री वनखंडी महादेव मंदिर का उल्लेख करते हुए श्रद्धालुओं को यहां दर्शन के लिए आमंत्रित किया है. उन्होंने कहा कि इस मंदिर में उत्तराखंड के अलावा देश के अलग-अलग हिस्सों और पड़ोसी नेपाल से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं. सावन में मंदिर में विशेष धार्मिक गतिविधियां होती हैं.
ऊधम सिंह नगर के सीमावर्ती क्षेत्र में स्थित श्री वनखंडी महादेव मंदिर भगवान शिव के भक्तों के लिए आस्था का प्रमुख केंद्र है. सावन के दौरान यहां श्रद्धालुओं की आवाजाही बढ़ जाती है. देश के अलग-अलग हिस्सों से लोग मंदिर पहुंचकर भगवान शिव के दर्शन करते हैं और जलाभिषेक करते हैं. पड़ोसी नेपाल से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां पहुंचते हैं.
पवित्र सावन मास में देवाधिदेव महादेव की आराधना और जलाभिषेक का विशेष महत्व है। ऊधम सिंह नगर के सीमांत क्षेत्र में स्थित पौराणिक श्री वनखंडी महादेव मंदिर भगवान शिव की असीम आस्था का प्रमुख केंद्र है। यहां भारत के विभिन्न क्षेत्रों के साथ ही पड़ोसी देश नेपाल से भी बड़ी संख्या में… pic.twitter.com/02iZFVMgFN
— Pushkar Singh Dhami (@pushkardhami) August 8, 2026
मुख्यमंत्री धामी ने बताया कि सावन के पवित्र महीने में भगवान शिव की पूजा और जल से अभिषेक करने की विशेष धार्मिक मान्यता है. श्रद्धालु इस दौरान पूरी श्रद्धा के साथ मंदिर में पूजा-अर्चना और अनुष्ठान करते हैं. मान्यता है कि सच्चे मन से वनखंडी महादेव की आराधना करने से भक्तों की मनोकामनाएं पूरी होती हैं और उन्हें भगवान शिव का आशीर्वाद मिलता है.
मुख्यमंत्री ने अपने संदेश में वनखंडी महादेव मंदिर को भगवान शिव के प्रति अटूट आस्था का प्रतीक बताया. उन्होंने श्रद्धालुओं को इस धार्मिक स्थल की विशेषता से परिचित कराया और कहा कि ऊधम सिंह नगर आने वाले लोगों को मंदिर के दर्शन जरूर करने चाहिए. उनके संदेश का उद्देश्य इस प्राचीन धार्मिक स्थल के प्रति लोगों की रुचि और आस्था को सामने लाना भी है.
वनखंडी महादेव मंदिर की धार्मिक पहचान केवल स्थानीय क्षेत्र तक सीमित नहीं है. सावन के दौरान यहां भारत के विभिन्न हिस्सों से श्रद्धालु पहुंचते हैं. नेपाल से आने वाले भक्त भी मंदिर में भगवान शिव का जलाभिषेक करते हैं. श्रद्धालुओं की आस्था और धार्मिक परंपराओं के कारण सावन में मंदिर का वातावरण विशेष भक्तिमय नजर आता है.