अंकिता भंडारी हत्याकांड में सभी आरोपियों को एक बार फिर अदालत से राहत नहीं मिली. आरोपियों की जमानत याचिकाएं खारिज होने के बाद उत्तराखंड सरकार ने इसे मजबूत जांच और प्रभावी अभियोजन का परिणाम बताया. सरकार के मुताबिक, मामले में आरोपियों को घटना के 24 घंटे के भीतर गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया था और अंतिम फैसले तक वे हिरासत में रहे.
घटना सामने आने के बाद मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मामले में सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए थे. निष्पक्ष जांच के लिए विशेष जांच दल यानी SIT का गठन किया गया. जांच के दौरान करीब 500 पन्नों की चार्जशीट तैयार की गई, जिसमें लगभग 100 गवाहों के बयान और अन्य महत्वपूर्ण साक्ष्यों को शामिल किया गया. आरोपियों के खिलाफ गैंगस्टर्स एक्ट के तहत भी कार्रवाई की गई.
Uttarakhand | The three convicts in the high-profile Ankita Bhandari murder case have suffered a major setback in the Uttarakhand High Court. The court has dismissed the bail pleas of the three convicted accused Pulkit Arya, Saurabh and Ankit Gupta.
— ANI UP/Uttarakhand (@ANINewsUP) August 19, 2026
A division bench comprising…
सरकार का दावा है कि अभियोजन पक्ष ने अदालत में मामले को प्रभावी तरीके से रखा, जिसके चलते आरोपियों की जमानत याचिकाएं लगातार खारिज होती रहीं. इसी जांच और अभियोजन के आधार पर आरोपियों को आखिरकार दोषी ठहराया गया और उम्रकैद की सजा सुनाई गई. सरकार ने इसे अंकिता के परिवार को न्याय दिलाने की दिशा में महत्वपूर्ण परिणाम बताया.
सरकार के अनुसार, अंकिता के माता-पिता की भावनाओं और मांगों को पूरे मामले में प्राथमिकता दी गई. परिवार के अनुरोध पर सरकारी वकीलों में तीन बार बदलाव किया गया. इसके अलावा, जब अंकिता के माता-पिता ने CBI जांच की मांग की तो सरकार ने उनकी मांग स्वीकार करते हुए मामले की जांच CBI को सौंपने का आदेश दिया.
धामी सरकार ने परिवार को 25 लाख रुपए की आर्थिक सहायता देने की बात भी कही है. इसके साथ ही अंकिता के भाई और पिता को रोजगार उपलब्ध कराया गया. सरकार का कहना है कि इन कदमों का उद्देश्य मुश्किल समय में परिवार के साथ खड़ा होना और उन्हें आर्थिक सहारा देना था.
मामले में कथित VIP कनेक्शन को लेकर कांग्रेस और अन्य संगठनों की ओर से लगातार सवाल उठाए जाते रहे हैं. सरकार ने आरोप लगाया कि यदि किसी के पास ठोस तथ्य या सबूत थे तो उन्हें जांच एजेंसियों और अदालत के सामने पेश किया जाना चाहिए था. सरकार के मुताबिक, संवेदनशील मामले को राजनीतिक मुद्दा बनाने के बजाय न्यायिक प्रक्रिया पर भरोसा किया जाना चाहिए.
धामी सरकार ने कहा कि शुरुआत से उसका रुख स्पष्ट रहा है कि अपराधी कितना भी प्रभावशाली क्यों न हो, कानून अपना काम करेगा. गिरफ्तारी, SIT जांच, चार्जशीट, अभियोजन, जमानत का विरोध, परिवार की मांग पर वकीलों में बदलाव, आर्थिक सहायता और CBI जांच जैसे कदमों का हवाला देते हुए सरकार ने कहा कि अंकिता को न्याय दिलाना उसकी सर्वोच्च प्राथमिकता रही.