देहरादून: उत्तराखंड के पिथौरागढ़ जिले की चीन सीमा से लगी व्यास घाटी में आदि कैलाश और ओम पर्वत की यात्रा एक बार फिर शुरू होने जा रही है. मानसून के दौरान भूस्खलन और सड़क से जुड़े खतरों को देखते हुए जुलाई और अगस्त में यात्रा रोक दी गई थी. अब मौसम में सुधार के साथ प्रशासन 15 सितंबर से यात्रियों को अनुमति देने की तैयारी कर रहा है. इस साल यात्रा को लेकर श्रद्धालुओं में खासा उत्साह देखने को मिला है.
आदि कैलाश और ओम पर्वत यात्रा की लोकप्रियता लगातार बढ़ रही है. 2022 में करीब 2 हजार श्रद्धालु पहुंचे थे. 2023 में यह संख्या 14 हजार हो गई, जबकि 2024 में 29,352 और 2025 में 36,526 यात्रियों ने दर्शन किए. इस साल मई और जून में ही करीब 52 हजार श्रद्धालु पहुंच चुके हैं. सड़क और अन्य सुविधाओं के विस्तार ने इस सीमांत धार्मिक क्षेत्र तक पहुंच आसान की है.
आदि कैलाश का रास्ता दुर्गम पहाड़ी क्षेत्र से होकर गुजरता है. बारिश के मौसम में यहां भूस्खलन, बोल्डर गिरने और सड़क बंद होने का खतरा बढ़ जाता है. व्यास घाटी की कई सड़कें बेहद संकरी और संवेदनशील हैं. यात्रियों की सुरक्षा को देखते हुए प्रशासन ने जुलाई और अगस्त में यात्रा स्थगित रखी. इस दौरान इनर लाइन परमिट भी जारी नहीं किए गए, ताकि खराब मौसम में किसी तरह का जोखिम न हो.
आदि कैलाश की यात्रा पर आने वाले श्रद्धालुओं को ओम पर्वत के दर्शन का अवसर भी मिलता है. समुद्र तल से करीब 5,590 मीटर की ऊंचाई पर स्थित इस पर्वत पर बर्फ के बीच प्राकृतिक रूप से ॐ की आकृति दिखाई देती है. नाभीढांग से इसका दृश्य देखा जा सकता है. धार्मिक आस्था के साथ-साथ यहां का दुर्गम हिमालयी भू-दृश्य भी यात्रियों के आकर्षण का प्रमुख कारण है.
धारचूला के एसडीएम आशीष जोशी के अनुसार, प्रशासन ने 15 सितंबर से यात्रा शुरू कराने की योजना बनाई है. बरसात का दौर खत्म होने के बाद इनर लाइन परमिट जारी करने की प्रक्रिया शुरू होगी. हालांकि अंतिम अनुमति मौसम और सड़क की स्थिति को ध्यान में रखकर दी जाएगी. यात्रा शुरू होने पर धारचूला, गुंजी, नाबी और कुटी जैसे सीमांत गांवों में भी गतिविधियां बढ़ने की उम्मीद है.
आदि कैलाश यात्रा को भविष्य में सीमित मौसम के बजाय सालभर संचालित करने की दिशा में भी काम किया जा रहा है. सड़क, सुरक्षा और मौसम से जुड़ी व्यवस्थाएं बेहतर होने पर श्रद्धालुओं को लंबे समय तक यात्रा का अवसर मिल सकता है. इससे धारचूला और व्यास घाटी में धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है. होटल, होम स्टे, वाहन, गाइड और पोर्टर जैसी स्थानीय सेवाओं से जुड़े लोगों को भी इसका सीधा लाभ मिल सकता है.