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CM योगी का वकीलों के लिए बड़ा तोहफा, 5 लाख तक कैशलेस बीमा; चैंबर और फीस पर भी बड़े ऐलान

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अधिवक्ताओं के लिए सालाना पांच लाख रुपये तक कैशलेस मेडिकल इंश्योरेंस, चैंबर सुविधाओं में सरकारी सहयोग और 400 राज्य विधि अधिकारियों को टैबलेट देने की घोषणा की.

Kuldeep Sharma
Edited By: Kuldeep Sharma
Anuj Kumar
Reported By: Anuj Kumar
CM योगी का वकीलों के लिए बड़ा तोहफा, 5 लाख तक कैशलेस बीमा; चैंबर और फीस पर भी बड़े ऐलान
Courtesy: india daily 24X7

इलाहाबाद हाई कोर्ट बार एसोसिएशन के सम्मान समारोह में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अधिवक्ताओं के लिए कई बड़ी घोषणाएं कीं. उन्होंने कहा कि मजबूत और आधुनिक बार ही बेहतर न्याय व्यवस्था की नींव रख सकती है. सरकार 10 हजार से अधिक अधिवक्ताओं के चैंबर और दूसरी सुविधाओं के लिए भी सहयोग करेगी.

अधिवक्ताओं को मिलेगा 5 लाख तक कैशलेस बीमा

मुख्यमंत्री ने प्रदेश के हाई कोर्ट और जिला अदालतों में सक्रिय अधिवक्ताओं को सालाना पांच लाख रुपये तक का कैशलेस मेडिकल इंश्योरेंस देने की घोषणा की. इसके साथ अधिवक्ता कल्याण निधि की राशि 1.5 लाख से बढ़ाकर पांच लाख रुपये करने की बात कही गई. अधिवक्ता के निधन पर परिजनों को सहायता पाने की उम्र सीमा भी 60 से बढ़ाकर 70 वर्ष कर दी गई है.

700 करोड़ से बने चैंबर, सुविधाओं पर भी जोर

योगी ने बताया कि प्रयागराज में करीब 700 करोड़ रुपये की लागत से 10 हजार से अधिक अधिवक्ताओं के लिए चैंबर तैयार किए जा चुके हैं. यहां मल्टीलेवल पार्किंग, डाइनिंग हॉल, कॉमन रूम और लाइब्रेरी जैसी सुविधाएं भी विकसित की गई हैं. चैंबर में फर्नीचर और जरूरी उपकरण उपलब्ध कराने के लिए बार या न्यायपालिका की ओर से प्रस्ताव आने पर सरकार ने सहयोग का भरोसा दिया है.

400 विधि अधिकारियों को टैबलेट, फीस भी बढ़ी

मुख्यमंत्री ने 400 राज्य विधि अधिकारियों को टैबलेट देने की घोषणा की. साथ ही उनकी फीस में 50 फीसदी से अधिक बढ़ोतरी की गई है. उन्होंने कहा कि न्याय व्यवस्था को आधुनिक तकनीक से जोड़ना समय की जरूरत है. अदालतों और जेलों को हाईस्पीड इंटरनेट और वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से जोड़ा गया है, जबकि दस्तावेजों के डिजिटाइजेशन और ऑनलाइन अभियोजन व्यवस्था पर भी काम किया जा रहा है.

फ्यूचर रेडी बार पर सीएम का जोर

योगी आदित्यनाथ ने कहा कि नई पीढ़ी के अधिवक्ताओं को संवैधानिक मूल्यों के प्रहरी के रूप में अपनी भूमिका निभानी चाहिए. उन्होंने कहा कि आज न्याय व्यवस्था के सामने साइबर अपराध, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डेटा प्राइवेसी, डिजिटल कॉमर्स और फिनटेक जैसी नई चुनौतियां हैं. सरकार ने न्यायिक इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने की दिशा में भी काम किया है. 10 जिलों में इंटीग्रेटेड कोर्ट कॉम्प्लेक्स बनाए जा रहे हैं, जबकि प्रथम चरण में 900 जनपदीय स्तर के फास्ट ट्रैक न्यायालयों के गठन को मंजूरी दी गई है.