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नकली सिक्का बनाने वाली गैंग का भंडाफोड़, 25 साल से कर रहे थे खेल, कमाई सुन हर कोई दंग

पुलिस ने नकली सिक्के बनाने वाले एक बड़े गिरोह का भंडाफोड़ किया है. यह गिरोह करीब 25 साल से नकली सिक्के बनाकर बाजार में खपा रहा था. पुलिस ने फैक्ट्री में छापा मारकर पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया है.

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Edited By: Antima Pal
नकली सिक्का बनाने वाली गैंग का भंडाफोड़, 25 साल से कर रहे थे खेल, कमाई सुन हर कोई दंग
Courtesy: Pinterest

सहारनपुर: सहारनपुर पुलिस ने नकली सिक्के बनाने वाले एक बड़े गिरोह का भंडाफोड़ किया है. यह गिरोह करीब 25 साल से नकली सिक्के बनाकर बाजार में खपा रहा था. पुलिस ने फैक्ट्री में छापा मारकर पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया है. पूरे गिरोह में आठ सदस्य बताए जा रहे हैं. बाकी तीन अभी फरार हैं और उनकी तलाश जारी है.

नकली सिक्का बनाने वाली गैंग का भंडाफोड़

गिरोह का मास्टरमाइंड मोहाली, पंजाब का रहने वाला उपकार लूथरा उर्फ अभय प्रताप सिंह है. पुलिस के अनुसार वह साल 2001 से ही नकली सिक्के बनाने के धंधे में सक्रिय है. दिल्ली पुलिस पहले भी उसे गिरफ्तार कर चुकी है और एक समय उस पर एक लाख रुपये का इनाम घोषित था. अब सहारनपुर पुलिस उसके पुराने संपर्कों और नेटवर्क की जांच कर रही है.

25 साल से कर रहे थे खेल

फैक्ट्री में सिर्फ सिक्के ढालने का काम नहीं होता था. वहां मशीनें, डाई और फिनिशिंग का पूरा इंतजाम था ताकि सिक्के असली जैसे चमकदार और सही लगें. पुलिस के मुताबिक रोज करीब 12 हजार बीस रुपये के नकली सिक्के बनाने की क्षमता थी. इतनी बड़ी संख्या में सिक्के बाजार में पहुंचाने का नेटवर्क भी काफी बड़ा माना जा रहा है.

पुलिस को सात हिसाब-किताब के रजिस्टर और आठ मोबाइल फोन मिले हैं. ये सबूत बहुत महत्वपूर्ण हैं. इनसे पता चलेगा कि सिक्के कहां-कहां बनाए जाते थे, किन लोगों तक पहुंचते थे और बाजार में इन्हें कैसे खपाया जाता था. रजिस्टरों में कमाई और संपर्क का असली हिसाब छिपा हो सकता है.

जांच अधिकारी पुराने नेटवर्क की कड़ियां खंगाल रहे हैं. वे जानना चाहते हैं कि इतने लंबे समय में कौन-कौन लोग जुड़े रहे और क्या पुराने साथी अलग-अलग जगहों पर नए ठिकाने बनाकर काम करते रहे. सहारनपुर में नया बेस बनाने के पीछे कौन लोग थे, यह भी जांच का हिस्सा है.