वाराणसी: संत शिरोमणि गुरु रविदास की 650वीं जयंती वर्ष के अवसर पर वाराणसी के सीर गोवर्धन स्थित संत रविदास जन्मस्थली में भव्य कार्यक्रम आयोजित किया गया. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इसमें शामिल होकर समरसता संकल्प अभियान की शुरुआत की और संत रविदास को श्रद्धांजलि अर्पित की. इस दौरान उन्होंने समाज में समानता, भाईचारे और सामाजिक समरसता के संदेश को आगे बढ़ाने पर जोर दिया. कार्यक्रम में भाजपा के कई वरिष्ठ नेताओं ने भी भाग लेकर संत रविदास के विचारों को जन-जन तक पहुंचाने का संकल्प दोहराया.
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मंदिर परिसर में आयोजित कार्यक्रम में संत रविदास को नमन करते हुए समरसता संकल्प अभियान का शुभारंभ किया. उन्होंने कहा कि संत रविदास का जीवन सामाजिक समानता, मानवता और सद्भाव का प्रतीक है. उनके विचार आज भी समाज को भेदभाव से ऊपर उठकर एकजुट रहने की प्रेरणा देते हैं. मुख्यमंत्री ने युवाओं से संत रविदास की शिक्षाओं को अपनाने का आह्वान किया.
मुख्यमंत्री ने कहा कि संत रविदास की ऐतिहासिक विरासत का सम्मान करते हुए भदोही जिले का नाम फिर से संत रविदास नगर किया जाएगा. उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार संत रविदास की शिक्षाओं और उनके सामाजिक योगदान को संरक्षित करने के लिए प्रतिबद्ध है. उनके अनुसार यह कदम संत की विरासत को नई पीढ़ी तक पहुंचाने की दिशा में महत्वपूर्ण होगा.
कार्यक्रम में भाजपा नेताओं ने संत रविदास के विचारों को सामाजिक समरसता और राष्ट्र निर्माण का आधार बताया. अनुसूचित मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष लाल सिंह आर्य ने कहा कि संत रविदास ने कर्म, गुण और चरित्र को जन्म से अधिक महत्वपूर्ण बताया था. उन्होंने संत की वाणी का उल्लेख करते हुए समाज से जातिगत भेदभाव समाप्त करने की अपील की.
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी ने कहा कि संत रविदास ने समाज को समानता और सामाजिक परिवर्तन का मार्ग दिखाया. उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी संत रविदास के विचारों को पूरे समाज की साझा विरासत मानते हैं. वहीं राष्ट्रीय महामंत्री तरुण चुग ने बताया कि संत रविदास की जन्मस्थली की पवित्र मिट्टी को 131 कलशों में संग्रहित कर देशभर के 20 हजार से अधिक स्थानों तक पहुंचाया जाएगा.
कार्यक्रम की सभी तैयारियां पूरी कर ली गई थीं, लेकिन पहले प्रस्तावित भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन का दौरा बिहार उपचुनाव की व्यस्तताओं के कारण निरस्त कर दिया गया. इसके बावजूद कार्यक्रम निर्धारित समय पर आयोजित हुआ और बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं तथा पार्टी कार्यकर्ताओं ने इसमें भाग लिया. आयोजन के दौरान सामाजिक समरसता और संत रविदास के संदेश को व्यापक स्तर पर पहुंचाने का संकल्प दोहराया गया.