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अब बिल्डरों की मनमानी खत्म! UP RERA के नए नियमों से घर खरीदारों को बड़ी राहत

उत्तर प्रदेश रेरा ने मेंटेनेंस सिक्योरिटी फंड को लेकर नए नियम लागू कर दिए हैं. अब बिल्डर इस राशि को अलग बैंक खाते और एफडी में रखेंगे तथा आरडब्ल्यूए को पूरा हिसाब सौंपना अनिवार्य होगा.

Kuldeep Sharma
Edited By: Kuldeep Sharma
अब बिल्डरों की मनमानी खत्म! UP RERA के नए नियमों से घर खरीदारों को बड़ी राहत
Courtesy: social media

उत्तर प्रदेश में फ्लैट खरीदने वाले लोगों के हितों की सुरक्षा के लिए यूपी रेरा ने बड़ा कदम उठाया है. मेंटेनेंस सिक्योरिटी फंड को लेकर लंबे समय से उठ रहे विवादों और पारदर्शिता की कमी को देखते हुए नए नियम लागू किए गए हैं. अब बिल्डरों को ग्राहकों से वसूले गए इस फंड का अलग से हिसाब रखना होगा और राशि को सुरक्षित बैंक एफडी में जमा करना होगा. इससे खरीदारों के पैसे की सुरक्षा और जवाबदेही दोनों सुनिश्चित होंगी.

मेंटेनेंस फंड पर बिल्डरों की मनमानी पर रोक

यूपी रेरा के नए नियमों के अनुसार, बिल्डर अब मेंटेनेंस सिक्योरिटी के नाम पर ली गई राशि को अपने सामान्य या निजी बैंक खाते में नहीं रख सकेंगे. इसके लिए अलग बैंक खाता खोलना अनिवार्य होगा, जिसमें जमा राशि को अधिक ब्याज देने वाली बैंक की फिक्स्ड डिपॉजिट में निवेश करना होगा. इस व्यवस्था का उद्देश्य खरीदारों के पैसे को सुरक्षित रखना और उस पर बेहतर रिटर्न सुनिश्चित करना है. साथ ही प्रोजेक्ट पूरा होने के बाद इस फंड का पूरा रिकॉर्ड भी संरक्षित रखना होगा ताकि किसी प्रकार की वित्तीय अनियमितता की गुंजाइश न रहे.

RWA को मिलेगा पूरा फंड और खर्च का हिसाब

रेरा ने स्पष्ट किया है कि जैसे ही किसी आवासीय परियोजना का कॉमन एरिया रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशन (RWA) या अपार्टमेंट ओनर्स एसोसिएशन (AOA) को सौंपा जाएगा, बिल्डर को मेंटेनेंस फंड की पूरी राशि संबंधित संस्था के खाते में ट्रांसफर करनी होगी. इसके साथ प्रत्येक फ्लैट मालिक से प्राप्त राशि, किए गए खर्च और शेष बची रकम का विस्तृत लिखित विवरण भी देना अनिवार्य रहेगा. इससे भविष्य में फंड को लेकर होने वाले विवादों में कमी आएगी और पूरी प्रक्रिया अधिक पारदर्शी बनेगी.

चार्ज तय, ऑडिट भी अब होगा अनिवार्य

नए नियमों में अलग-अलग श्रेणी की संपत्तियों के लिए मेंटेनेंस सिक्योरिटी की दरें भी निर्धारित कर दी गई हैं. मल्टीस्टोरी आवासीय परियोजनाओं में यह शुल्क श्रेणी के अनुसार 20 से 100 रुपये प्रति वर्ग फुट तक रहेगा, जबकि बिना एसी और सेंट्रल एसी वाली व्यावसायिक इकाइयों के लिए अलग-अलग दरें तय की गई हैं. इस फंड का उपयोग केवल लिफ्ट, पार्क, जनरेटर और अन्य साझा सुविधाओं की मरम्मत या बदलाव पर किया जा सकेगा. साथ ही RWA या AOA को हर वर्ष चार्टर्ड अकाउंटेंट से ऑडिट कराकर उसकी रिपोर्ट आम सभा में प्रस्तुत करना अनिवार्य होगा. यूपी रेरा के अध्यक्ष संजय आर. भूसरेड्डी ने कहा कि इन नियमों से घर खरीदारों का पैसा सुरक्षित रहेगा, पारदर्शिता बढ़ेगी और बिल्डरों की जवाबदेही भी तय होगी.